हिंदी विश्‍वविद्यालय में ‘सिने शिक्षा : रोजगार की संभावनाएं एवं भविष्‍य की चुनौतियाँ’ विषय पर राष्‍ट्रीय वेबिनार

विश्‍वविद्यालय में बनेगा सिने शिक्षा का केंद्र- माननीय कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल

वर्धा : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के प्रदर्शनकारी कला विभाग की ओर से बुधवार, 10 जून को ‘सिने शिक्षा : रोजगार की संभावनाएं एवं भविष्‍य की चुनौतियाँ’ विषय पर राष्‍ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल सर ने कहा कि विश्‍वविद्यालय में प्रदर्शनकारी कला विभाग में विद्यार्थियों को सिनेमा से संबंधित अभिनय, उत्पाद और वितरण आदि की शिक्षा दी जाएगी और विभाग को प्रदर्शनकारी कला का उत्कृष्ट केंद्र बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक को अपनाकर सरकार, सिनेमा उद्योग और टीवी के लिए आवश्यक मानव संसाधन तथा रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं। भारतीय भाषाओं के प्रसार में हिंदी सिनेमा के योगदान का उल्लेख करते हुए प्रो. शुक्ल सर ने कहा कि केवल मनोरंजन ही नहीं अपितु सामाजिक परिवर्तन के माध्यम के रूप में हिंदी सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन्होंने जनसंचार की तरह प्रदर्शनकारी कला को शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनाने पर बल दिया।

वेबिनार में मुख्‍य अतिथि के रूप में माखनलाल चतुर्वेदी जनसंचार विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री जगदीश उपासने, प्रख्‍यात फिल्‍मकार श्री विवेक अग्निहोत्री, वरिष्‍ठ पत्रकार एवं फिल्‍म समीक्षक श्री अनंत विजय, जम्‍मू विश्‍वविद्यालय के प्रो. परीक्षित सिंह मिन्‍हाज, विसलिंग वुड्स इंटरनेशनल मुंबई के प्रो. सुदीप्‍तो आचार्य, गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्‍थ विश्‍वविद्यालय, नई दिल्‍ली की डॉ. कुलवीन त्रेहन ने सिने शिक्षा, रोजगार, सिनेमा-पर्यटन का अंतर्संबंध, मीडिया में दृश्य-श्रव्य माध्यम की उपादेयता, सिने शिक्षा की संभावनाएं और चुनौतियां आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा की.

कार्यक्रम की संयोजक प्रदर्शनकारी कला विभाग की अध्‍यक्ष प्रो. प्रीति सागर ने स्वागत वक्तव्य दिया तथा संचालन विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं वेबिनार के सह-संयोजक श्री यशार्थ मंजुल ने किया। सुदीप्तो आचार्य ने कहा कि सिने शिक्षा को विद्यार्थी केंद्रित बनाया जाना चाहिए. प्रदर्शनकारी कला में तकनीकी शिक्षा को आवश्यक बताते हुए उन्होंने सिने शिक्षा को लेकर अपनी बात रखी।

डॉ. कुलवीन त्रेहन ने समाज माध्यमों पर विज्ञापन और संहिता लेखन के असीम अवसरों पर बात की। उन्होंने कहा कि वेब मार्केटिंग कम्यूनिकेशन और अन्य प्लेटफार्म पर कौशल प्राप्त युवाओं की मांग कोरोना महामारी के दौरान काफी संख्या में बढ़ रही है। वरिष्ठ पत्रकार, सिने समीक्षक अनंत विजय ने कहा कि क्लाउड तकनीक, डाटाबेस एवं नेटवर्किंग के क्षेत्र में हाल के दिनों में रोजगार बढ़ गये है।

कोरोना संकट के कारण फिल्में प्रदर्शित नहीं होने के कारण वेब सिरीज़ का चलन जोरो पर है। मांग आधारित विडियो और ओवर द टॉप में युवाओं के लिए नये अवसर खुल रहे हैं। रेडियो की लोकप्रियता बढने से इसमें भी रोजगार के अवसर बढ़ गये हैं। वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने मीडिया में दृश्य श्रव्य माध्यम की उपादेयता विषय पर कहा कि शिक्षा संस्थाओं को बदलती तकनीक को अपनाकर मीडिया योद्धाओं को तैयार करना चाहिए।

संदेश को ठोस, स्पष्ट और विश्वसनीय बनाने के कौशल वाले युवाओं की विश्वभर में आवश्यकता होती है, उसे पूरा करने का काम विश्वविद्यालयों को करना चाहिए। फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति, कला , साहित्य, योग, आयुर्वेद आदि विषयों पर सिने शिक्षा देने की जरूरत है। इन विषयों पर फिल्में बनाकर भारतीय संस्कृति और सभ्यता को सामने लाना चाहिए। उन्होंने माना कि समाज का रचनात्मकता का चरित्र मजबूत होने से ही अच्छे संस्कार मिलेंगे और मूल्यों का विकास हो सकेगा।

उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि विद्यार्थियों को मीडिया और फिल्म क्षेत्र में रोजगार के लिए नवाचारों की शिक्षा देने की पहल की जानी चाहिए। कार्यक्रम में सहायक अध्यापक डॉ. सतीश पावडे ने आभार ज्ञापित किया। वेबिनार में प्रति कुलपति द्वय प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्ल, प्रो. चंद्रकांत रागीट समेत अध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

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