Home साहित्य

साहित्य

जलधारा ने राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बहाई राष्ट्रीय चेतना की धारा

0
कोलकाता : जलधारा हिंदी साहित्यिक संस्था (पंजीकृत) की पश्चिम बंगाल इकाई के अंतर्गत दिनांक २४ जनवरी २०२१, रविवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य...

राष्ट्रीय कवि संगम का कवि सम्मेलन सम्पन्न

0
आज हावड़ा के शांति विद्यालय में राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वाधान में राष्ट्रीय कवि-संगम के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ० गिरधर राय जी के मार्गदर्शन में...

डीपी सिंह की कुण्डलिया

0
पहले दिन ही था कहा, मोदी ने, प्रण लेउँ ख़ुद भी खाऊँगा नहीं, और न खाने देउँ और न खाने देउँ, विपक्षी पर कब कम हैं बिरयानी-बादाम,...

अर्जुन अज्जू तितौरिया की कविता : रणभूमि

0
रणभूमि वीरों का रण सजा है रणचंडी के आवाह्न पर, दस-दस पर एक है भारी शत्रुदल की सेना पर। युद्ध ने अब स्वयं चुना है बागी दल के वीरों को, हमने...

डीपी सिंह की कुण्डलिया

0
चलते हैं सरकार के, बिल पर बिल के बान। रहे विपक्षी बिलबिला, बैठे तम्बू तान।। बैठे तम्बू तान, सड़क पर हठधर्मी-से। हरकत से हैं चीन, पाक के...

प्रमोद तिवारी की कविता – कुरूक्षेत्रः मेरी नजर से (प्रथम भाग)

0
कुरूक्षेत्रः मेरी नजर से (प्रथम भाग) रण की भेरी बज गई, बर्छियाँ थी तन गई, अस्त्र सब निकल गये, मान इनके बढ गये। महारथी की टोलियाँ, लगा रहीं थी बोलियाँ, नशे...

“दहेजुआ साइकिल” : (कहानी) :– श्रीराम पुकार शर्मा

0
आज ही मेरे कुंवर साहब (एकमात्र पुत्र) एक बेशकीमती 'रॉयल इन्फिल्ड बुलेट 350' फटफटिया खरीद लाये हैं। सूचना पाकर अति उत्साहित मैं सपत्नी अपनी...

डीपी सिंह की कुण्डलिया

0
बाहर से आती अगर, कोरोना वैक्सीन। अरबों का होता यहाँ, हेर-फेर का सीन।। हेर-फेर का सीन, स्वदेशी क्यों बनवानी? "बीजेपी वैक्सीन", नहीं हमको लगवानी।। टोंटी भैया एक कर...

डीपी सिंह की कविता : “बेटी”

0
*बेटी* ===== है कलम व्यग्र इतिहास लिखते हुए बच्चियों की व्यथा, त्रास लिखते हुए वह कली, ठीक से जो खिली भी न थी शाख से तोड़कर धूल में रौंद...

कानून के हाथ (व्यंग्य) : श्याम कुमार राई ‘सलुवावाला

1
😃 कानून के हाथ 😃 ब्रेकिंग न्यूज : विश्वस्त सूत्रों के हवाले से पता चला है कि अब तक ड्रग्स का सेवन करने वाले और...

विशेष

युवा मंच