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वैचारिकी

कांच का लिबास संग नगरी

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उनकी नकाब हट गई तो उनका असली चेहरा सामने आएगा जो खुद उन्हीं को डराएगा। आईना उनको कोई दिखा नहीं सकता है दाग़ ही...

हिंदी, हिंदीं दिवस और हिंदी वाले

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मेरी ज़िंदगी गुज़री है हिंदी में लिखते लिखते। 44 साल से तो नियमित लिखता रहा हूं हर दिन। आज 14 सितंबर है हिंदी दिवस...

एक रुपये की इज़्ज़त का सवाल

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इधर लोग अपनी इज़्ज़त की बात लाखों नहीं करोड़ों में करने लगे थे। मानहानि के दावे की रकम की कोई सीमा नहीं थी ऐसे...

हम जड़ता में जकड़े लोग (तर्कहीन समाज)

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दुनिया अनुभव से सबक सीखती है और अनावश्यक अनुपयोगी अतार्किक बातों से पल्ला झाड़कर सही दिशा को भविष्य में आगे बढ़ती रहती है लेकिन...

प्रवासियों के लिए आगे कुआं पीछे खाई

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आज पूरे देश के विभिन्न राज्यों में जितने भी प्रवासी मजदूर लॉक डाउन के दौरान अपने अपने गांव घरों को लौटे हैं उनमें से...

हैवानियत शर्मसार नहीं

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समझते हैं अभी भी दुनिया उन्हीं से है जिनको नहीं खबर आना जाना किधर से है। ये लोग जो खुद को भगवान समझते हैं...

देश के सबसे बड़े हिंदी पट्टी यूपी में ही हिंदी कमजोर

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आज कलम के जादूगर, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर बहुत ही दुःख के साथ यह लिखना पड़ रहा है कि मुंशी...

राजनीतिक पहचान के लिए भटकता बिहार का दलित पान समाज

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एक सभ्य समाज के लोगों में सामाजिक और राजनीतिक चेतना का होना बहुत ही जरूरी है और बिहार की आबादी में लगभग सात प्रतिशत...

सवाल उल्टे – सीधे जवाब सीधे सच्चे

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पहला सवाल :- भाजपा नेताओं को लॉक डाउन के नियम से छूट कैसे है। क्या कोरोना का बचाव सभी के लिए ज़रूरी नहीं है। जवाब...

सावधान दोस्तों ! मुश्किल दौर में है  देश …!!

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वाकई, यह बड़ा मुश्किल दौर है दोस्तों। चौतरफा मुसीबतें देश को घेरती जा रही है, जिससे निपटने में फिलहाल राजनैतिक सत्ता नाकाम ही नजर...

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