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विनय सिंह बैस की कलम से : मूंछ कथा

नई दिल्ली। सदियों से मूछें मर्दानगी का प्रतीक रही हैं। भारत में वीर और स्वाभिमानी जातियों में मूछें रखने की परंपरा रही है क्योंकि मूछें आन-बान और शान का प्रतीक मानी जाती रही हैं। इतिहास की बात करें तो 1854 में ईस्ट इंडिया कंपनी की बॉम्बे आर्मी केवल मूंछों वाले पुरुषों को ही सेना में भर्ती करती थी। क्योंकि उनका मानना था कि जिन पुरुषों की मूंछ नहीं होती है, उनमें मर्दानगी की कमी होती है या वे किशोर होते हैं। 1860 में ब्रिटेन के राजा के आदेश पर सभी ब्रिटिश सैनिकों के लिए मूंछे रखना अनिवार्य कर दिया गया था। मतलब मूंछे नहीं तो वर्दी नहीं। हालांकि 1916 में यह आदेश वापस ले लिया गया था।

मनुष्यों की तरह उनकी मूंछे भी कई तरह की होती हैं :
1. राजसी मूंछे :- इस तरह की मूंछे प्राचीन काल से राजाओं की शान रही हैं। घनी और रौबदार मूंछों को राजसी मूंछे कहा जाता है।

2. झुकी हुई मूंछे :- इस तरह की मूंछे चीन, कोरिया, जापान आदि देश के लोगों में अधिक पाई जाती हैं। इनमें मूंछों के बीच में थोड़ा गैप होता है और वह दोनों तरफ से नीचे की ओर झुकी हुई होती हैं।

3. राजपूती मूंछे :- तलवार की तरह नुकीली और तीखी मूंछों को राजपूती मूंछे कहते हैं। इस तरह की मूंछे नीचे मोटी और ऊपर जाकर पतली, तीखी और नुकीली हो जाती हैं।

4. पेंसिल मूंछे :- यह मूंछे अत्यंत बारीक होती हैं। इतनी बारीक जैसे पेंसिल से कोई रेखा ऊपरी होंठ पर खींच दी गई हो। आदि आदि

मूंछों से भारतीय समाज का भावनात्मक लगाव रहा है। मूंछे झुकना, मूंछों पर ताव देना, मूंछ मुड़ाना, मूंछ का बाल होना जैसे मुहावरे भारतीय परिवेश में खूब प्रचलित रहे हैं। सामाजिक मान्यता रही है कि पिता के जीवित होने तक मूंछे नहीं मुंडवानी चाहिए। अभी कुछ ही महीनों पूर्व की वह घटना आपको याद होगी जब एमपी पुलिस के कांस्टेबल राकेश राणा ने एक पुलिस अधिकारी की आपत्ति पर निलंबित होना स्वीकार किया था लेकिन मूंछे कटवाने से मना कर दिया था।

एक बार बचपन में गणतंत्र दिवस परेड के दौरान बीएसएफ के जवानों की एक टुकड़ी मैंने देखी थी जिसमें सभी जवानों की बड़ी, घनी और रौबदार मूंछे थी। इस तरह की मूंछों को हमारी स्थानीय भाषा में ‘गलमूंछे’ कहा जाता है। तब यह भी सुना था की सेना में मूंछे रखने वाले जवानों को ‘Moustache Allowance’ के नाम से एक अलग भत्ता मिलता था। तभी से मैंने ठान लिया था कि बड़े होने पर मैं भी घनी और रौबदार मूंछे रखूंगा ताकि अगर मैं सिविल की नौकरी करूँ तो मुझे आकर्षक लुक और सेना में जाऊं तो मुझे Moustache Allowance मिले।

वायु सेवा में जाने के बाद तमाम प्रयासों और कई बार शेविंग करने के बाद भी मेरी वैसी मूंछे नहीं आई, जैसी मुझे चाहिए थी। अतः मन मसोसकर कर मुझे क्लीन शेव रहना स्वीकार करना पड़ा। अभी कुछ पूर्व साले की शादी समारोह में रौबीली मूंछों वाले एक रिश्तेदार मिले जो पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त थे। मैंने पास जाकर उनकी मूंछों की तारीफ की तो वह खुश हो गए और मुझे अपने पास बैठा लिया। फिर दो रिटायर्ड लोगों के मध्य वायुसेना और पुलिस की चर्चा चल निकली।

बातों-बातों में वह मुझसे कहने लगे कि तुम्हें भी मूंछे रखनी चाहिए क्योंकि तुम वायुसेना में रहे हो, राजपूत हो और ठीकठाक दिखते भी हो। अब मैं उनसे कैसे कहता कि मूंछे रखने के लिए मैंने क्या-क्या जतन नहीं किए। सब फल खाकर मैं धतूरे में लटका हूँ। लेकिन मैं वायु सेवा का झंडा पुलिस के सामने झुकने नहीं देना चाहता था, इसलिए उनसे बड़ी विनम्रता पूर्वक कहा कि मेरे मूंछे न रखने के निम्नलिखित कारण हैं:

1. वैज्ञानिक कारण : विज्ञान कहता है कि मूंछे किसी की इच्छा से नहीं बल्कि एड्रेनल नामक हार्मोन के कम या ज्यादा होने के कारण होती हैं। मुझमें शायद यह हार्मोन कम होगा।

2. सैन्य कारण : वायु सेवा में मूंछे रखने से ऑक्सीजन मास्क पहनने में दिक्कत होती है। इससे खुद के साथ-साथ कई बार दूसरों का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है।

3. समय और संसाधनों की बचत : मूंछे रखने से शेविंग में ज्यादा समय लगता है क्योंकि मूंछों का भी ध्यान रखना पड़ता है। मूंछे न रहने से आप अंधेरे में, बिना शीशे के भी फटाफट शेविंग कर सकते हैं।
और
4. राजसी कारण : ताश के पत्तों में चार बादशाह होते हैं। तीन की मूंछे हैं लेकिन सबसे सुंदर यानि लाल पान के बादशाह (रोमन साम्राज्य के पहले राजा शारलेमेन) की मूंछे नहीं हैं।

5. धार्मिक (दैवीय) कारण : हिंदू धर्म के सभी प्रमुख देवताओं की मूंछे नहीं है। मेरी भी रगो में रक्त रघुनाथ का है फिर मैं मूंछे कैसे रख सकता हूं।

सब कुछ जानते हुए भी वह रिश्तेदार मेरे तर्कों से लाजवाब हो गए और मुस्कुराने लगे। फिर मुझे गले लगाकर ताउम्र क्लीन शेव रहने का आशीर्वाद दिया।

विनय सिंह बैस, लेखक

(विनय सिंह बैस)
क्लीन शेव पुरुषों के ब्रांड एंबेसडर

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