साहित्यडीपी सिंह की रचनाएं Posted on August 17, 2022 by Ashreya Prasad ज़ुबां कड़वी है, मीठी, तो कभी अनमोल मोती है ये जब मुँह में नहीं होती, तो रिश्तों को सँजोती है कभी तो चीरती है ये कलेजा तीर, खंजर-सी सँभाले से न सँभले जब कभी दो गज की होती है डीपी सिंह जम्मू में एक ही परिवार के छह लोगों के शव संदिग्ध हालत में मिले स्वतंत्रता दिवस पर भूतपूर्व छात्रों द्वारा रिसड़ा विद्यापीठ में पुरस्कार वितरण सम्पन्न