राजीव कुमार झा की कविता : गुमनाम

।।गुमनाम।। राजीव कुमार झा ग्रीष्म का मौसम तुम्हें अपने ताप से दिनभर बेहाल करता बहते

राजीव कुमार झा की कविता : स्विमिंग पूल

।।स्विमिंग पूल।। राजीव कुमार झा वे पहले प्यार के दिन तब लोगों की नजर से

राजीव कुमार झा की कविता : मुहब्बत की कसम

।।मुहब्बत की कसम।। राजीव कुमार झा सुनकर हंसी आती अपने वायदों के बारे में सोचकर

राजीव कुमार झा की कविता : आसमान

।।आसमान।। राजीव कुमार झा इश्क के सुनहरे रंग दमक रहे अंग अंग सुबह की रोशनी

राजीव कुमार झा की कविता : चाय की प्याली

।।चाय की प्याली।। राजीव कुमार झा प्यार का मधुर तुम गीत गाकर सबको सुनाना जिंदगी

राजीव कुमार झा की कविता : आनंद

।।आनंद।। राजीव कुमार झा मेरे प्यार को आज के बाद सारी उम्र में पाना किसी

राजीव कुमार झा की कविता : गुमनाम

।।गुमनाम।। राजीव कुमार झा रोशन मन से फूलों के चेहरे गुमनाम बने प्यार के सपने

राजीव कुमार झा की कविता : महफिल

।।महफिल।। राजीव कुमार झा नदी के किनारे प्यार का आंचल लहराता नीला आकाश तुम्हारे कदमों

राजीव कुमार झा की कविता : फूलों की रानी

।।फूलों की रानी।। राजीव कुमार झा कभी प्यार की धूप में आकर नदी के किनारे

राजीव कुमार झा की कविता : जो कभी जाने

।।जो कभी जाने।। राजीव कुमार झा कातिल के कारनामे सुनकर ख़ामोश होकर सब निकल पड़े