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  • पैसेंजर पहुंचे 3 घंटे में, एक्सप्रेस लेती है 5:30 घंटे

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर‌ : लॉकडाउन के पश्चात ट्रेन परिचालन शुरू होने के बाद रेल महकमे में विचित्र उलटबांसी देखने को मिल रही है क्योंकि प्रशासन ने कई लोकल व पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस का दर्जा दे दिया है। ऐसे में वहीं ट्रेन, वही स्पीड, मगर किराया एक्सप्रेस का लग रहा है। लोकल या पैसेंजर समझ कर इन ट्रेनों में चढ़ने वाले यात्रियों से जुर्माना भी वसूला जा रहा है। इनमें खड़गपुर-भद्रक पैसेंजर की हालत तो और भी अजीब है। रोज सुबह 5.25 बजे खड़गपुर से छुटने वाली यह ट्रेन भद्रक जाते समय पैसेंजर होती है लेकिन वापसी में यही ट्रेन एक्सप्रेस हो जाती है।

IMG-20220629-WA0024 इस ट्रेन का अप का किराया 40 रुपये तो डाउन का किराया 75 रुपये है। भुक्तभोगी यात्रियों से मिली जानकारी के मुताबिक पैसेंजर बन कर जो अप ट्रेन साढ़े 3 घंटे में 182 किलोमीटर का सफर तय करती है, वापसी में एक्सप्रेस बन कर इसी ट्रेन को इतनी ही दूरी तय करने मैं 5 घंटे लगते हैं। इससे यात्री बेहद परेशान हैं। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के शौचालयों में पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं होती।

इससे महिलाओं और बच्चों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  यात्रियों का सवाल है कि ऐसा कैसे हो सकता है कि एक ही ट्रेन 1 फेरे में पैसेंजर और वापसी में एक्सप्रेस हो जाए। सबसे बड़ी बात तो यह कि पैसेंजर बन कर जो ट्रेन जल्दी मंजिल पर पहुंचती है, एक्सप्रेस के रूप में सफर तय करने में उसे तकरीबन 2 गुना समय लगता है।

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