‘राम ह्रदय बस मोरा’… एक भव्य काव्यारती समर्पित – अयोध्यापति भगवान् श्री राम के चरणों में

दीखने लगे हैं अब बाम को भी राम जी – डॉ. गिरधर राय

कोलकाता । घट-घट में बसने वाले अयोध्यापति भगवान् श्री राम जी की भव्य काव्यारती के साथ, राष्ट्रीय कवि संगम की मध्य कोलकाता इकाई द्वारा संस्था के प्रांतीय अध्यक्ष – डॉ. गिरधर राय की अध्यक्षता में, एक अभूतपूर्व ऑनलाइन काव्योत्सव का आयोजन किया गया जिसका अत्यंत ही कुशल संचालन किया – नवांकुर कवयित्री जूही मिश्रा एवं पुष्पा साव ने। इस अवसर पर विशेष रूप से – आदरणीय डॉ. राजकुमार चतुर्वेदी एवं संस्था के संरक्षक उमेश चंद तिवारी ने उपस्थित होकर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।इस कार्यक्रम के गूगल मीट एवं फेसबुक पटल पर ऑनलाइन प्रसारण के तकनीकी दायित्य का निर्वाह किया युवा कवि देवेश मिश्रा ने। कार्यक्रम का शुभारम्भ – संस्था के मध्य कोलकता इकाई के अध्यक्ष रामाकांत सिन्हा द्वारा श्री राम वन्दना की प्रस्तुति के साथ हुआ।

तत्पश्चात, संस्था की महामंत्री – स्वागता बासु जी ने उपस्थित सभी काव्य रसिकों का अभिनन्दन किया और छायावाद के महाकवि जयशंकर प्रसाद जी की जयंती पर सभी का ध्यान आकर्षित करते हुए कविवर प्रसाद जी की कविता – “हिमाद्रि तुंग श्रृंग से” का काव्य पाठ कर सभी में ऊर्जा भरते हुए कार्यक्रम को और भी गतिशीलता प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. राजकुमार चतुर्वेदी ने भी महाकवि प्रसाद के अभूतपूर्व लेखन से आज की युवा पीढ़ी को अवगत करवाया। तत्पश्चात, एक-एक कर, 17 बेजोड़ रचनाकारों ने भगवान् श्री राम पर आधारित – स्वरचित एवं अनुकृत रचनाओं का पाठ कर सभी का मन मोह लिया।

स्वरचित रचनाओं में- प्रांतीय महामंत्री एवं विशिष्ट अतिथि – रामपुकार सिंह की – ‘आओ सुधिजन तुम्हें सुनाएं महिमा प्रभु श्री राम की’, प्रांतीय मंत्री एवं मुख्य अतिथि – बलवंत सिंह की – ‘राघव तुमको आना होगा’, मध्य कोलकता अध्यक्ष रामाकांत सिन्हा की – ‘हे प्रभु श्री राम हमारे’, प्रांत के संरक्षक – उमेश चंद तिवारी की – ‘राम गुण गाते चलो’, मध्य कोलकाता की साहित्य मंत्री निखिता पाण्डेय की – ‘राम नाम है सबसे प्यारा’, मध्य कोलकाता की सोशल मीडिया प्रमुख जूही मिश्रा की – ‘श्री राम ने सिखाया त्याग और समर्पण करना’, सुषमा राय पटेल की – ‘राम को याद करके हमने, जीवन को आबाद किया’, आलोक चौधरी की – ‘रघुवर डोल रहे हैं’, सौमि मजुमदार की – ‘हे राम जी पधारो म्हारे देश’, देवेश मिश्रा की – ‘गीत राम का गाना है’, नंदलाल रौशन की – ‘राम तुम्हारे बिना भला यह जीवन कैसा’ एवं निशा साव की – ‘दशरथ पुत्र राम, जो थे साक्षात नारायण के अवतार’ विशेष रूप से सराही गयी।

किन्तु कार्यक्रम में सर्वाधिक तालियाँ बटोरी प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. गिरधर राय जी की एक समकालीन कविता ने, जिसके बोल हैं – ‘जितने भी नाम इतिहास से भुला दिए थे’। इस कविता की एक पंक्ति – ‘दीखने लगे हैं अब बाम को भी राम जी’ पर सभी ठहाके लगाकर हंस पड़े और ज़ोरदार तालियों के साथ राय साहब की प्रसंशा की। साथ ही, इस अवसर पर श्री राम जी से जुड़ी कुछ चिर-परिचित अनुकृत रचनाओं का पाठ कर – अंजू चौबे एवं पुष्पा साव ने कार्यक्रम की छटा को और भी निखार दिया। इनके अतिरिक्त भक्ति धारा से भिन्न स्वरचित रचनाओं में – रीमा पांडे की – ‘मुस्कुराकर मुझे इक नज़र देखना’, रौशन की – ‘जो हँसते आये मक़तल को’ एवं राय साहब की – ‘कहूं मैं किससे मन की बात’ ने सभी को भावविभोर कर दिया। अंत में प्रांत के संरक्षक – उमेश चंद तिवारी ने यह कहकर धन्यवाद ज्ञापन किया कि – “कली है चमन में, तो फूल खिलते रहेंगे/आप सबका स्नेह रहा, तो हम सभी मिलते रहेंगे” और इन्हीं पंक्तियों के साथ यह अभूतपूर्व कार्यक्रम सुसंपन्न किया।

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