Rahul Gandhi

नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे पश्न करते हुए कहा है कि जनता से जुड़े सवालों की सूची लंबी है लेकिन वह सिर्फ 10 सवाल कर रहे है और इन पर मोदी से जवाब चाहते हैं। गांधी ने कहा कि मानसून सत्र में कांग्रेस सरकार से जनता के मुद्दों पर चर्चा करवाना चाहती थी और इनमें कई सवाल थे जिनके जवाब मोदी को देने थे लेकिन सरकार तानाशाही पर उतर आई है और इन सवालो से प्रधानमंत्री इतने नाराज़ हो गए कि सवाल पूछने की कोशिश करने वाले 57 सांसदों को गिरफ़्तार कर 23 को निलंबित करवा दिया।

उन्होंने कहा कि जो सवाल संसद में नही पूछने दिए उनमें से इन 10 सवालों का जवाब मोदी को देना चाहिए और बताना चाहिए कि 45 सालों में आज सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी क्यों है और हर साल दो करोड़ रोज़गार देने के वादे का क्या हुआ। जनता के रोज़मर्रा के खाने-पीने की चीज़ों जैसे दही-अनाज पर जीएसटी लगा कर उनकी दो वक़्त की रोटी क्यों छीनी जा रही है। गांधी ने पूछा कि खाद्य तेल, पेट्रोल-डीज़ल और सिलेंडर के दाम आसमान छू रहे हैं, जनता राहत कब मिलेगी और डॉलर के मुकाबले रूपए की कीमत 80 पार क्यों हो गई।

सेना में दो साल से एक भी भर्ती नहीं कर सरकार ‘अग्निपथ’ योजना लाई है और युवाओं को चार साल के ठेके पर ‘अग्निवीर’ बनने पर मजबूर क्यों कर रही है। लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना भारतीय सीमा में घुस चुकी है लेकिन सरकार चुप क्यों है। उन्होंने फसल बीमा को लेकर भी सरकार से सवाल किया और कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों को 40 हज़ार करोड़ का फायदा करवा दिया मगर 2022 तक किसानों की ‘आय दोगुनी’ करने के वादे पर चुप क्यों। किसान को सही एमएसपी के वादे का क्या हुआ?

किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवज़ा मिलने का क्या हुआ। कांग्रेस नेता ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के रेल टिकट में मिलने वाली 50 प्रतिशत छूट को बंद क्यों किया। जब अपने प्रचार पर इतना पैसा खर्च कर सकते हैं तो, बुज़ुर्गों को छूट देने के लिए पैसे क्यों नहीं हैं। केंद्र सरकार पर 2014 में 56 लाख करोड़ कर्ज़ था वो अब बढ़ कर 139 लाख करोड़ हो गया है।

अगले वर्ष मार्च तक 156 लाख करोड़ हो जाएगा आप देश को कर्ज़ में क्यों डुबा रहे हैं। उन्होंने कहा,“सवालों की लिस्ट बहुत लम्बी है लेकिन पहले प्रधानमंत्री जी मेरे इन 10 सवालों का जवाब दे दें। कांग्रेस पार्टी को डराने-धमकाने से आपकी जवाबदेही ख़त्म नहीं हो जाएगी, हम जनता की आवाज़ हैं और उनके मुद्दे उठाते रहेंगे।”

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