राजीव कुमार झा की कविता : मन की बात

फोटो साभार : गुगल

।।मन की बात।।
राजीव कुमार झा

तुम कोई बात आज बताओ!
जो याद तुम्हें नहीं आये,
भूले बिसरे कुछ लोगों को, पास बुलाओ!
खूब पुरानी कोई एक कहानी,
तुमने कहीं लिखी है!
अपना टूटा मन भी जुड़ जाएगा!
फिर कोई तुमको पास बहुत पाएगा,
अपने मन की बात बताएगा!
देखो वसंत आया! नवजीवन लाया,
धूप निकल आयी! आज हवा हरसाई!
पीली सरसो सबको भायी!
सबको धरती का यह श्रृंगार सुहाता! काश किसी को,
वह भी मन की बात बताता!

राजीव कुमार झा, कवि/समीक्षक
Shrestha Sharad Samman Awards

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