नयी दिल्ली। राष्ट्रीय अस्पताल एवं स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता मान्यता बोर्ड (एनएबीएच) ने देश में मातृत्व मृत्यु दर घटाने और प्रसूति की स्थिति में सुधार के लिए देश में चिकित्सकों के सबसे बडे संगठन भारतीय प्रसूति एवं स्त्री रोग चिकित्सक महासंघ (फोग्सी) के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं, जिससे निजी क्षेत्र के अस्पतालों के प्रसूति विभागों की कार्यप्रणाली में समानता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
एनएबीएच के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ अतुल मोहन कोछड़, फोग्सी की अध्यक्ष डॉ एस. शांता कुमारी, निर्वाचित अध्यक्ष डॉ हरिषिकेश डी. पई और संयोजक डॉ हेमा दिवाकर ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए बताया कि देश में मातृत्व मृत्यु दर बहुत अधिक है।

यह प्रति लाख 103 है, जो मात्र नाइजीरिया से कम है। उन्होंने कहा कि मात्र प्रसूति क्रियाओं और मामूली देखभाल से प्रसूता महिलाओं की जान बचाई जा सकती है। डॉ कुमारी और डॉ दिवाकर ने कहा कि फोग्सी ने मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाने और सतत् विकास लक्ष्य हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र के अस्पतालों में प्रसूति केंद्रों की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘मान्यता’ अभियान शुरू किया है। इसके अंतर्गत सभी निजी अस्पतालों में प्रसूति केंद्रों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। फोग्सी का लक्ष्य सभी प्रसूताओं के लिए न्यूनतम सुविधायें और देखभाल सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि इसके लिए फोग्सी के मान्यता अभियान ने 16 मानक तय किये हैं, जिनका किसी भी प्रसूता केंद्र में होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि फोग्सी का लक्ष्य प्रत्येक माँ की जान बचाना है और इसके लिए यह अभियान देश भर के 45 हजार से अधिक अस्पतालों तक पहुंचेगा। डॉ पई ने कहा कि इस सहमति पत्र से फोग्सी के मानकों को एनएबीएच से मान्यता मिलेगी और इनका दायरा बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि एनएबीएच के साथ जुड़ने से फोग्सी अपने अभियान को ज्यादा गंभीरता से चला पायेगा और देश की समृद्धि में योगदान देगा। डॉ कोछड़ ने कहा कि फोग्सी से देशभर के 40 हजार से अधिक चिकित्सक जुड़े हैं और ये मानक इन विशेषज्ञों ने कड़े परिश्रम और अनुभव के बाद तैयार किये हैं। इनसे निश्चित रूप से प्रसूता संबंधी प्रक्रियाओं और देखभाल तंत्र में सुधार होगा।

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