कोलकाता। कोलकाता के पर्यावरणविदों ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के व्यवहार्य विकल्प खोजने के लिए योजना की कमी है। एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर एक जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं को भी प्रतिबंध के बाद इस्तेमाल किए जाने वाले सही प्रकार के सामान रखने वाले थैले (कैरी बैग) के बारे में जानकारी नहीं है। पर्यावरणविद एस. एम. घोष ने कहा कि कोलकाता के बाजार में 75 माइक्रोन प्लास्टिक कैरी बैग बिना सरकारी प्रमाणन के उपलब्ध हैं।

एक अन्य प्रमुख हरित योद्धा सुभाष दत्ता ने कहा, ‘‘कम लागत, अच्छी गुणवत्ता वाले वैकल्पिक उत्पादों जैसे कैरी बैग, प्लेट, चम्मच का पता लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की आर एंड डी इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया तत्काल शुरू होनी चाहिए, जिन्हें बाद में एसएमई स्तर पर निर्मित किया जा सकता है।’’ दत्ता ने कहा कि प्रतिबंध को लागू करने में केंद्र और राज्य द्वारा दिखाई गई तत्परता सराहनीय है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक के व्यवहार्य विकल्प खोजने की योजना का अभाव है।

उन्होंने कहा कि कोई भी उपयुक्त विकल्प विक्रेताओं और खरीदारों दोनों के लिए महंगा होता है। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक मैंने देखा है कि लोगों, राज्य तथा केंद्र दोनों सरकारों के रवैये में उल्लेखनीय बदलाव आया है। लेकिन प्रतिबंधित उत्पादों के कम लागत, व्यवहार्य और आसानी से उपलब्ध विकल्पों के उपयोग के संबंध में किसी भी दिशा के बारे में थोड़ा भ्रम
है।’’ ‘सेव रवींद्र सरोवर’ के प्रचारक एवं हरित कार्यकर्ता सोमेंद्र मोहन घोष ने कहा कि विभिन्न कारणों से शहर में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध को अभी तक ठीक से लागू नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘कोलकाता नगर निगम, पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य पर्यावरण विभाग प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले उपभोक्ताओं और विक्रेताओं पर जुर्माना नहीं लगा रहे हैं, केवल 40 प्रतिशत नागरिक एकल उपयोग प्लास्टिक द्वारा प्रदूषण को खत्म करने में रुचि रखते हैं।’’ उन्होंने कहा कि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के स्थान पर वैकल्पिक सामग्री की कमी है और उपभोक्ता उत्पाद निर्माता प्लास्टिक पैकेजिंग को बदलने के लिए गंभीर नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘गुटखा फॉयल के पैकेट भी बाजार में हैं। यहां तक कि शीतल पेय के लिए प्लास्टिक के स्ट्रॉ पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।’’ पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि एक जुलाई से बाजार स्थलों पर निगरानी की जा रही है ताकि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का और अधिक उपयोग न हो और यह अभियान अब तक सफल रहा है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पुलिस और कोलकाता नगर निगम के साथ समन्वय करता है क्योंकि हम खुद कार्रवाई नहीं कर सकते। हमारे परिवेश ऐप का उपयोग जनता द्वारा किया जा सकता है, यदि उन्हें किसी तरह के उल्लंघन का पता चलता है।’’उन्होंने कहा कि लोगों को बाजारों और दुकानों में पेपर बैग और 75 माइक्रोन से ऊपर के प्लास्टिक का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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