Sansad

जानिए देश के नए संसद भवन को

विनय सिंह बैस, नई दिल्ली । एडविन लुटियन और हरबर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंदिर भारत का संसद भवन सन 1927 में बनकर तैयार हुआ था। इस ऐतिहासिक इमारत ने भारतीय लोकतंत्र के शैशव काल से लेकर 75 बरसों का लंबा सफर देखा है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने “Tryst with destiny” के नाम से प्रसिद्ध स्वतंत्र भारत का पहला भाषण इसी संसद भवन के सेंट्रल हॉल में दिया था। इसी भवन में भारत के संविधान के निर्माण की 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन की लंबी प्रक्रिया चली थी।

विगत 75 वर्षों से यह भवन तमाम ऐतिहासिक विधानों के निर्माण, बहसों, वाद-विवाद का मूक साक्षी रहा है। इस भवन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी बाजपेई जैसे प्रखर राजनेताओं को अपनी बात रखते देखा है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसे जन कवियों ने भी इस भवन में कालजयी भाषण दिए हैं।

किंतु कहते हैं न कि हर अच्छी चीज का अंत भी निश्चित होता है। वर्तमान संसद भवन एक सदी से अधिक पुराना है। यह शानदार भवन आज की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ साबित हो रहा है। इसमें पार्किंग की पर्याप्त सुविधा नहीं है। नए गैजेट लगाने की व्यवस्था नहीं है। वर्तमान संसद सदस्यों के बैठने की भी पर्याप्त सुविधा नहीं है। 2026 में होने वाले परिसीमन के बाद संसद सदस्यों की संख्या बढ़ जाएगी। इन बढ़े हुए संसद सदस्यों के बैठने के लिए इस भवन में और अधिक विस्तार की बिल्कुल भी गुंजाइश नहीं है। सुरक्षा मानकों पर भी यह भवन अब खरा नहीं उतरता है। अतः नए संसद भवन का निर्माण अपरिहार्य हो गया था।

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विनय सिंह बैस
अनुवाद अधिकारी
लोकसभा सचिवालय

नया संसद भवन : वास्तुकार विमल पटेल द्वारा डिजाइन किया हुआ और टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा बनाया जा रहा नया संसद भवन बस तैयार होने को है। संसद के मानसून सत्र के दौरान 05 अगस्त को एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया था कि नए संसद भवन का 70% काम पूरा हो चुका है। सब कुछ ठीक रहा और निर्माण कार्य इसी तरह युद्ध स्तर पर चलता रहा तो संसद का शीतकालीन सत्र नए संसद भवन में आयोजित होगा।

नया संसद भवन 64500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बना हुआ है। यह त्रिभुजाकार आकार का है और भूकंप रोधी है। यह इको फ्रेंडली ग्रीन कंस्ट्रक्शन इमारत बनेगी जिससे लगभग 30% बिजली की बचत होगी। दिव्यांग जनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नया संसद भवन व्हीलचेयर फ्रेंडली बनाया गया है। नया संसद भवन का निर्माण अगले 150 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। इस संसद भवन में वर्तमान संसद भवन की अपेक्षा डेढ़ गुना से अधिक सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी।

वर्तमान लोकसभा चेंबर में 545 सदस्यों की बैठने की व्यवस्था है जबकि नए लोकसभा चेंबर में 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसी तरह वर्तमान राज्यसभा चेंबर में 245 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है जबकि जबकि नए राज्यसभा के चेंबर में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। संयुक्त सत्र के दौरान 1272 सदस्य तक लोकसभा चेंबर में बैठ सकेंगे।

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इस संसद भवन में संविधान हाल, समिति कक्ष और तीन भोजन कक्ष होंगे। एक भोजन कक्ष संसद सदस्यों के लिए, एक भोजन कक्ष संसद के कर्मचारियों के लिए तथा एक भोजन कक्ष मीडिया और आगंतुकों के लिए होगा। नए संसद भवन में पार्किंग की बेहतर व्यवस्था होगी। इसमें डिजिटल इंटरफेस और उच्च गुणवत्ता की ऑडियो वीडियो सुविधा भी होगी।

नए संसद परिसर में सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम होंगे। इस भवन में देश की तमाम कलाकृतियों और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा। पुराने संसद भवन के सामने स्थापित महात्मा गांधी की मूर्ति पुराने और नए संसद भवन के बीच सेतु का काम करेगी। नया संसद भवन बड़ा और बेहतर होगा किंतु पुराने संसद भवन की स्मृतियां हमारे मन मस्तिष्क में सदैव बसी रहेंगी।

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