विनय कुमार, कोलकाता। डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय (डीएचडब्ल्यूयू) इस शैक्षणिक वर्ष से आपदा प्रबंधन पर स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का मानना ​​है कि इस तरह का पाठ्यक्रम छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद होगा क्योंकि उनमें से अधिकांश सुंदरबन के दूरदराज के द्वीपों से आते हैं, जहां प्राकृतिक आपदाएं एक सामान्य घटना है। इस मौके पर डीएचडब्ल्यूयू के कुलपति सोमा बंद्योपाध्याय ने कहा, “राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदा जैसे चक्रवात, भारी वर्षा आदि की कोई चेतावनी मिलते ही लोगों के बचाव और पुनर्वास के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया है। हालांकि, हमारा मानना ​​है कि अगर छात्रों को इस तरह की प्राकृतिक आपदा से खुद को बचाने के बारे में अच्छी जानकारी देनी चहिए, जिससे वे आपदा के समय इसे अपने माता-पिता और पड़ोसियों के साथ साझा कर सकते हैं और यह पूरे समुदाय के लिए मददगार होगा।”

बंद्योपाध्याय ने आगे कहा, ” आपदा प्रबंधन के आलावा हम इस शैक्षणिक वर्ष से लोकगीत अध्ययन में 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स और दलित अध्ययन में एक साल का डिप्लोमा कोर्स पेश करेंगे, जो जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है।” इसके साथ ही महिला दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय ने जिला पुलिस के सहयोग से आस्था ऐप लॉन्च करके अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।”

काबिले गौर है कि इस मौके पर महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए कुलपति सोमा बंद्योपाध्याय को सम्मानित किया गया।

वहीं, विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह वह जगह है जहां आपदा प्रबंधन का सामुदायिक ज्ञान काम आ सकता है।” डीएचडब्ल्यूयू विज्ञान और कला स्ट्रीम में 17 पाठ्यक्रमों में स्नातकोत्तर अध्ययन प्रदान करता है। विश्वविद्यालय में लगभग 1,200 विषम छात्र हैं, जिनमें 100 छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा है। विश्वविद्यालय पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर एक पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना बना रहा है, जो राज्य में अपनी तरह का पहला पाठ्यक्रम होगा।

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