कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मौलवियों-इमामों के एक संगठन ने कहा है कि हिंसा के दम पर लोगों को किसी भी हाल में बंधक नहीं बनाया जा सकता है। इस संगठन ने सीएम ममता बनर्जी से मांग की है कि अब राज्य में पैगंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर किसी तरह के विरोध प्रदर्शन की अनुमति न दी जाए। बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी से निलंबित नेता नूपुर शर्मा की टिप्पणी पर बवाल मचा हुआ है। यहां शुक्रवार से लगातार हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकारी संपतियों को नुकसान किया जा रहा है।

इसके बाद अब बंगाल इमाम एसोसिएशन ने सीएम ममता से अपील की है कि पैगंबर मोहम्मद के नाम पर किसी भी तरह की प्रदर्शन की इजाजत न दी जाए। इस संगठन ने मुस्लिम समाज से भी अपील की है कि वे कुछ लोगों के निहित स्वार्थ के चंगुल में न फंसे और हिंसा पर उतारू न हो। एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याहिया ने एक वीडियो बयान में कहा कि आंदोलन के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के एक वर्ग द्वारा हिंसा, आगजनी और संपत्तियों और पुलिसकर्मियों पर हमला करने से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और आम जनता को बहुत परेशानी हुई है।

मोहम्मद याहिया ने कहा, “हालांकि नूपुर शर्मा और दूसरे बीजेपी नेताओं की टिप्पणी को हम स्वीकार नहीं करते हैं कि और हम प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हम राज्य के लोगों को हिंसा के बल पर बंधक नहीं सकते हैं, जो कि हावड़ा, मुर्शिदाबाद और नादिया जिले में हो रहा है  सरकारी संपत्तियों को आग लगाना, पुलिस पर पत्थर चलाना फिर पुलिस की लाठी खाना इससे मजहब पसंद व्यक्ति या फिर उसके आइकान की छवि अच्छी नहीं हो जाती है।

बता दें कि याहिया ने राज्य भर में मस्जिदों के अंदर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, और बीजेपी के दो नेताओं की गिरफ्तारी की मांग की गई थी। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा था कि प्रशासन सड़कों को अवरुद्ध करने और जनता को परेशान करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।बंगाल में हिंसा में लिप्त 100 लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। रविवार देर शाम को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में प्रदर्शनकारियों ने एक लोकल ट्रेन पर हमला कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया था।

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