प्रतीकात्मक फोटो, साभार गूगल

नई दिल्ली। सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाले दुनिया के शीर्ष 10 शहरों में भारत के दिल्ली, कोलकाता और मुंबई शामिल हैं। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 556 है, जो सूची में शीर्ष पर पहुंच गया है। कोलकाता और मुंबई सूची में चौथे और छठे स्थान पर हैं। दोनों शहरों को सूचकांक क्रमश: 177 और 169 एक्यूआई दर्ज किया गया। सबसे खराब एक्यूआई सूचकांक वाले शहरों में पाकिस्तान में लाहौर और चीन में चेंगदू भी शामिल हैं।

एक रीयल-टाइम वायु गुणवत्ता सूचना मंच – आईक्यूएयर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) का एक तकनीकी भागीदार भी है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार सुबह दिल्ली की वायु गुणवत्ता 499 एक्यूआई थी, जबकि हवा में पीएम 10 और पीएम 2.5 प्रदूषकों का स्तर क्रमश: 134 और 72 एक्यूआई दर्ज किया गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सुबह 9 बजे आनंद विहार में 468, आईटीओ में 484, आरके पुरम में 433 और श्री अरबिंदो में 452 एक्यूआई दर्ज किया। शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 को ‘मध्यम’, 201 और 300 को ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ माना जाता है, फिर 401 और 500 के बीच को ‘गंभीर’ माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण पर गंभीरता से विचार किया और सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो, तो सरकार पराली जलाने, वाहनों, पटाखों, उद्योग और धूल के कारण बढ़े वायु प्रदूषण के स्तर को नीचे लाने के लिए दो दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसानों द्वारा पराली जलाए जाने से केवल 25 प्रतिशत प्रदूषण होता है और शेष 75 प्रतिशत प्रदूषण पटाखा जलाने, वाहनों के प्रदूषण, धूल आदि से होता है।

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