IMG 20240216 WA0040

80वीं पुण्यतिथि के अवसर पर याद किये गए भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के

काली दास पाण्डेय, मुंबई। गोरेगांव (मुम्बई) स्थित दादा साहेब फाल्के चित्र नगरी, फिल्म सिटी स्टूडियो में भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की 80वीं पुण्यतिथि के अवसर पर फिल्मसिटी स्टूडियो प्रबंधन द्वारा एक भव्य समारोह आयेजित किया गया। इस समारोह में भारतीय फिल्म जगत से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, बॉलीवुड के नामचीन शख्सियतों व महाराष्ट्र सरकार के प्रशासनिक पदाधिकारियों के अलावा दादा साहेब फाल्के के पोते चंद्रशेखर पुसालकर, उनकी पत्नी मृदुला पुसालकर और दत्तक पुत्री नेहा बंदोपाध्याय भी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सभी ने दादा साहेब फाल्के की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

इसके बाद दादा साहेब फाल्के की स्मृति में बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता, सिंगर और उद्घोषक राजू टांक के द्वारा सन् 1989 से संचालित बैनर बॉम्बे एंटरटेनमेंट के तत्वाधान में निर्धारित दादा साहेब फाल्के चित्रनगरी (फिल्म सिटी) अवॉर्ड 2024 के लिए फिल्म विधा से जुड़े चयनित नवोदित प्रतिभाओं को दादा साहेब फाल्के के पोते चंद्रशेखर पुसालकर, फैशन डिजाइनर मूनमुन चक्रवर्ती और राजू टांक द्वारा संयुक्त रुप से अवार्ड दे कर सम्मानित किया गया। फिल्मसिटी स्टूडियो प्रबंधन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड के वरिष्ठ फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय और पंडित अवधेश निर्मलेश पाठक की भी खास भागीदारी रही।

दादा साहेब फाल्के के पोते चंद्रशेखर कुशेलकर ने कार्यक्रम के दौरान अपने संक्षिप्त भाषण में दादा साहेब फाल्के के संघर्ष काल की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री पूरी दुनिया मे हर साल सबसे ज्यादा फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। देश का हर दूसरा नौजवान फिल्मों में काम करने की या फिर फिल्मों से जुड़ी अन्य विधाओं से खुद को जोड़ कर अपना कैरियर बनाना चाहता है। लेकिन देश में जब दादा साहेब फाल्के जी ने फिल्म निर्माण को शुरू किया होगा तो उनको कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा होगा, इसको हमेशा दिल और दिमाग में रखना होगा। आज सिनेमा उद्योग कई तरह के संकटों के दौर से गुजर रहा है। इससे घबराना नहीं है। आज धैर्य के साथ संघर्ष करने की आवश्यकता है।

यह भी पढ़ें:  2023 में होगा दो माह का श्रावण मास, इस बार आठ सोमवार पड़ेंगे

विदित हो कि दादासाहब फाल्के का असल नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था। उनका जन्म 30 अप्रैल, 1870 को महाराष्ट्र के त्रिम्बक (नासिक) में एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता गोविंद सदाशिव फाल्के संस्कृत के विद्धान और मंदिर में पुजारी थे। सन 1910 में तब के बंबई के अमरीका-इंडिया पिक्चर पैलेस में ‘द लाइफ ऑफ क्राइस्ट’ दिखाई गई थी। थियेटर में बैठकर फिल्म देख रहे धुंदीराज गोविंद फाल्के ने तालियां पीटते हुए निश्चय किया कि वो भी भारतीय धार्मिक और मिथकीय चरित्रों को रूपहले पर्दे पर जीवंत करेंगे। इसके बाद दादा साहेब ने फीचर फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण कार्य शुरू किया जो देश की पहली फीचर फिल्म के रूप में जानी जाती है।

दादा साहेब अपनी इस फिल्म के सब कुछ थे। उन्होंने इसका निर्माण किया, निर्देशक भी वही थे, कॉस्ट्यूम डिजाइन, लाइटमैन और कैमरा डिपार्टमेंट भी उन्हीं ने संभाला था। वही फिल्म की पटकथा के लेखक भी थे। 3 मई 1913 को इसे कोरोनेशन सिनेमा बॉम्बे में रिलीज किया गया। यह भारत की पहली फिल्म थी। राजा हरिश्चंद्र की सफलता के बाद दादा साहेब फाल्के ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद दादा साहेब फाल्के ने देश की पहली फिल्म कंपनी ‘हिंदुस्तान फिल्म्स’ की स्थापना की। ‘राजा हरिश्चंद्र’ से शुरू हुआ उनका करियर 19 सालों तक चला। राजा हरिश्चंद्र की सफलता के बाद अपने फिल्मी करियर में उन्होंने 95 फिल्म और 26 शॉर्ट फिल्में बनाईं।

यह भी पढ़ें:  सिलीगुड़ी : शहर के विकास के लिए तृणमूल व माकपा नेता आये साथ

उनकी सफल फिल्मों में मोहिनी भस्मासुर (1913), सत्यवान सावित्री (1914), लंका दहन (1917), श्री कृष्ण जन्म (1918) और कालिया मर्दन (1919) के नाम उल्लेखनीय हैं। उनकी आखिरी मूक फिल्म ‘सेतुबंधन’ थी और आखिरी फीचर फिल्म ‘गंगावतरण’ थी। उनका निधन 16 फरवरी 1944 को नासिक में हुआ था। उनके सम्मान में भारत सरकार ने 1969 में ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ देना शुरू किया। यह भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है।

सबसे पहले यह पुरस्कार पाने वाली देविका रानी चौधरी थीं। 1971 में भारतीय डाक विभाग ने दादा साहेब फाल्के के सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया। आज भले ही दादा साहेब फाल्के हमारे बीच नहीं है लेकिन आज भी उनका संदेश व उनके संघर्षों को बयां करते पदचिन्ह भारतीय फिल्म जगत के फिल्मकारों को कर्मपथ पर धैर्य के साथ अग्रसर रहने के लिए सदैव प्रेरित करता है और युगों युगों तक करता रहेगा।ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

राज कुमार गुप्त Avatar

राज कुमार गुप्त पिछले 12+ वर्षों से सब-एडिटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन में काम कर रहे हैं। वे खबरों को सटीक और संतुलित रूप देने में विशेषज्ञ हैं। कोलकाता के स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ है।

यह भी पढ़ें:  स्वयंसेवी संस्था 'एनआइपी' और 'अनुभव' की पहल पर 100 लोगों ने स्वेच्छा से किया नेत्र व अंगदान
Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *