वरूथिनी एकादशी व्रत कथा मूहूर्त की सही जानकारी

वाराणसी। रविवार, 16 अप्रैल 2023, वरूथिनी एकादशी का मुहूर्त – तिथि : 15 अप्रैल, 2023 8:46 सायं काल PM – 16 अप्रैल 2023, 6:14 सायं काल PM
व्रत तोड़ने(पारण) का समय – 17 अप्रैल 2023- 5:54 प्रातःकाल AM – 8:29 प्रातःकाल AM

वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व : पुराणों में वरुथिनी एकादशी को सौभाग्य प्रदान कराने वाला कहा गया है। इस दिन अन्नदान करने से पितृ, देवता, मनुष्य आदि सब की तृप्ति हो जाती है। स्वंय भगवान श्री कृष्णजी ने इस एकादशी का महाम्त्य अर्जुन को समझाया है। वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति का दुःख और दुर्भाग्य दूर होता है।

वरुथिनी एकादशी पूजा विधि : वरुथिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करके अपने घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं। साथ ही भगवान विष्णुजी की प्रतिमा का अभिषेक भी करें। इसके बाद भगवान विष्णुजी को वस्त्र आदि अर्पित करें। और भगवान विष्णुजी की पूरे विधि विधान के साथ पूजा और आरती करें। पूजा करते समय ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करें। साथ ही भगवान विष्णुजी को भोग जरुर लगाएं।

इस दिन भगवान विष्णु के वराह रुप की उपासना का विधान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वरुथिनी एकादशी के प्रभाव से ही राजा मान्धाता को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी। वरुथिनी एकादशी पर वराह रूप में विष्णु जी की पूजा करने से अन्नदान और कन्यादान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। पुराणों के अनुसार एकादशी का व्रत सौभाग्य में वृद्धि करता है और सौभाग्य का आधार संयम है। अगर व्रती में संयम नहीं है तो उसके तप, त्याग, भक्ति-पूजा आदि सब व्यर्थ हो जाते हैं। उसी प्रकार वरुथिनी एकादशी के दिन व्रत कथा का श्रवण किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

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वरुथिनी एकादशी कथा : भगवान श्रीकृष्णजी ने वरुथिनी एकादशी का महत्व बताते हुए युधिष्ठिर व अर्जुन को एक कथा सुनाई। पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर राजा मांधाता राज्य करते थे। राजा बहुत ही दानवीर और धर्मात्मा थे। एक बार राजा जंगल के पास तपस्या कर रहे थे। तभी वहां एक भालू आया और उनके पैर को चबाने लगा। तप में लीन राजा का पैर चबाते हुए भालू उन्हें घसीटकर जंगल में ले गया। घायल राजा ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की।

एकादशी व्रत से पाई शारीरिक पीड़ा से मुक्ति और मोक्ष : घबराए हुए राजा मांधाता ने करुण भाव से भगवान विष्णुजी को पुकारा और उसकी पुकार सुनकर भगवान श्रीहरि विष्णुजी प्रकट हुए और उन्होंने चक्र से भालू को मार डाला. भालू के हमले से राजा मंधाता अपंग हो गए थे, शारीरिक पीड़ा से वह बहुत दुःखी और कष्ट झेलने को मजबूर थे। इस पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान श्री विष्णुजी से उपाय पूछा। श्रीहरि बोले ये तुम्हारे पिछले जन्म का पाप है जो इस जन्म में भुगतना पड़ रहा है। भगवान श्री विष्णुजी ने राजा से वैशाख की वरुथिनी एकादशी का व्रत और पूजन करने को कहा।

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राजा मांधाता ने भगवान श्री विष्णु जी के बताए अनुसार वरुथिनी एकादशी पर श्रीहरि विष्णु जी के वराह रूप की पूजा की, जिसके प्रताप से वह शारीरिक पीड़ा से मुक्त हो गया और पुन: उसका शरीर स्वस्थ हो गया। सच्चे मन से एकादशी व्रत और पूजन करने पर राजा मांधाता को मोक्ष की प्राप्ति हुई।

पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री

ज्योर्तिविद वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 9993874848

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