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#Climateकहानी || जुलाई में दुनिया की 81 फीसद आबादी ने जलवायु परिवर्तन के कारण झेली भीषण गर्मी

Climateकहानी, कोलकाता। एक के बाद एक वैज्ञानिक सबूत हमारे सामने आते जा रहे हैं जो साफ कर रहे हैं कि बीती जुलाई मानव इतिहास, या उससे पहले के कालखंड की भी सबसे अधिक गरम जुलाई थी। इस बार क्लाइमेट सेंट्रल द्वारा जारी एक अभूतपूर्व रिपोर्ट में, यह पुष्टि की गई है कि जुलाई 2023 ने पृथ्वी के अब तक के सबसे गर्म महीने का खिताब हासिल किया है। मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने दुनिया भर में तापमान में अभूतपूर्व वृद्धि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक बेहद ताकतवर एट्रिब्यूशन टूल, क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स (सीएसआई), का उपयोग करते हुए क्लाइमेट सेंट्रल के इस विश्लेषण से चौंकाने वाले आंकड़ों का पता चलता है।

इसकी मानें तो दुनिया के 6.5 बिलियन से अधिक लोगों (वैश्विक आबादी का 81%) ने जुलाई में कम से कम एक दिन ऐसे तापमान का अनुभव किया जिसके उस स्तर तक होने कि संभावना जलवायु कारण तीन गुना थी। यह निष्कर्ष हमारे दैनिक जीवन पर जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभाव की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। लगभग 2 अरब लोगों ने जुलाई के 31 दिनों में से प्रत्येक दिन जलवायु परिवर्तन का बहुत तीव्र प्रभाव महसूस किया, जो समस्या की भयावहता को उजागर करता है।

10 जुलाई, 2023 को, अत्यधिक गर्मी का वैश्विक जोखिम अपने चरम पर पहुंच गया, जिससे दुनिया भर में 3.5 बिलियन लोग प्रभावित हुए। इन निष्कर्षों के चिंताजनक निहितार्थ वैश्विक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। क्लाइमेट सेंट्रल के विश्लेषण में 200 देशों में फैले ऐसे 4,700 शहरों को शामिल किया गया जहां जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप जुलाई में अत्यधिक गर्मी का अनुभव हुआ।

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मेक्सिको, दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिणी यूरोप, फ्लोरिडा, कैरेबियन, मध्य अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देश तापमान वृद्धि से सबसे अधिक प्रभावित हुए। भूमध्य रेखा के पास और छोटे द्वीपों पर रहने वालों ने विशेष रूप से जुलाई के तापमान पर मानव-जनित जलवायु परिवर्तन का असाधारण रूप से मजबूत प्रभाव महसूस किया।

कैरेबियन में 11 सहित छोटे द्वीप विकासशील राज्यों पर विनाशकारी प्रभाव स्पष्ट है, जलवायु परिवर्तन के कारण स्थितियां कम से कम पांच गुना अधिक होने की संभावना है। यह रिपोर्ट एशिया की स्थिति पर भी प्रकाश डालती है, जहां जुलाई 2023 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहरों ने अपना प्रभाव छोड़ा। चीन ने पश्चिमी झिंजियांग क्षेत्र में 52.2 डिग्री सेल्सियस (126 डिग्री फारेनहाइट) का एक नया राष्ट्रीय तापमान रिकॉर्ड दर्ज किया, जिसने 1.6 डिग्री सेल्सियस वाले अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

ईरान के फारस की खाड़ी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उसी तारीख को 66.7 डिग्री सेल्सियस (152 डिग्री फ़ारेनहाइट) का तापमान सूचकांक दर्ज किया गया। कुवैत को भी अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ा और 18 जुलाई को रिकॉर्ड-उच्च बिजली उपयोग की सूचना मिली। विश्लेषण किए गए 46 एशियाई देशों में, औसत जुलाई सीएसआई स्तर 2.4 था, जो क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।

दो मध्य एशियाई देशों, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में जुलाई में सबसे अधिक तापमान विसंगतियां दर्ज की गईं, जिससे चिंता बढ़ गई है। कुल 17 एशियाई देशों में जुलाई का औसत सीएसआई 3 या उससे अधिक था, जबकि उच्चतम जुलाई औसत सीएसआई वाले शीर्ष 10 एशियाई देशों में से पांच मध्य पूर्व में हैं। यह निष्कर्ष एक बार फिर स्पष्ट करते हैं कि तत्काल कार्रवाई अनिवार्य है। जलवायु परिवर्तन सूचकांक वैश्विक जलवायु परिवर्तन और लोगों के दिन-प्रतिदिन के अनुभवों के बीच अंतर को पाटने में मदद करता है, जो जलवायु परिवर्तन के लिए दैनिक तापमान परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराता है।

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अत्यधिक गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ तापमान का तीव्र प्रभाव तब तक जारी रहेगा जब तक कि ग्रीनहाउस गैस एमिशन शून्य तक कम नहीं हो जाता। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि एमिशन का वर्तमान प्रक्षेप पथ जारी रहता है, तो भविष्य के वर्षों में और अधिक रिकॉर्ड टूटेंगे और जलवायु संबंधी चुनौतियाँ बढ़ेंगी। यह सरकारों, उद्योगों और व्यक्तियों को तेजी से बदलती जलवायु को कम करने और उसके अनुकूल ढालने के लिए नीतियों और प्रथाओं को लागू करने के लिए एक साथ आने का आह्वान है।

ऐसा करने में विफलता मानव जीवन, जैव विविधता और समग्र रूप से ग्रह पर प्रभाव को बढ़ा देगी। अब यह स्पष्ट है कि हमें पृथ्वी पर एक टिकाऊ और लचीले भविष्य की ओर जाने के लिए ठोस और तत्काल प्रयासों की आवश्यकता है। केवल सामूहिक रूप से कार्य करके ही हम इस वैश्विक चुनौती का समाधान करने और वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की भलाई की रक्षा करने की आशा कर सकते हैं।

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