कोलकाता। अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को यह जानकारी दी। अधिकारी बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। वे सीएए को लागू कराने के लिए अमित शाह से मिलने दिल्ली आए थे। पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री को अवगत कराया कि कोविड महामारी के कारण रोकी गई प्रक्रिया को अब फिर से शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा पश्चिम बंगाल राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बता दें कि इस इस विवादास्पद अधिनियम को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन हुआ था।

इसे 11 दिसंबर, 2019 को संसद में पारित किया गया था। जनवरी 2020 में, मंत्रालय ने अधिसूचित किया कि अधिनियम 10 जनवरी 2020 से लागू होगा। सीएए के तहत नागरिकता प्रदान करने का मसला बंगाल में एक प्रमुख चुनावी मुद्दा था। यह एक प्रमुख कारण था कि भाजपा को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मतुआ समुदाय का समर्थन मिला, जिसे सीएए के लागू होने से सबसे अधिक लाभ होगा। मतुआ समुदाय अनुसूचित जाति के तहत आता है। अनुमानित तौर पर इस समुदाय के 5 करोड़ लोग हैं, जिसमें से लगभग 3 करोड़ अकेले पश्चिम बंगाल में हैं।

समुदाय के 1.5 करोड़ लोग मतदाता के रूप में सूचीबद्ध हैं। इस साल मई में, पश्चिम बंगाल में एक रैली को संबोधित करते हुए, अमित शाह ने कहा था कि कोविड-19 महामारी समाप्त होने के बाद सीएए कानून लागू किया जाएगा। पिछले साल दिसंबर में, पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने की मांग की था।

मंगलवार को शाह और अधिकारी ने राज्य में पार्टी के विस्तार से संबंधित संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा की। बंगाल इकाई ने 100 टीएमसी नेताओं की एक लिस्ट बनाई है। इस लिस्ट में शामिल नेताओं पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। अमित शाह के सामने लिस्ट पेश करते हुए बंगाल भाजपा नेता ने कहा कि वे चाहते हैं कि सरकार जांच के बाद उन पर उचित कार्रवाई करे।

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