प्रतिकात्मक फोटो, साभार गूगल

विनय सिंह बैस, नई दिल्ली । स्मरण रहे कि राम मंदिर का निर्माण किसी साम्प्रदायिक सद्भाव, गंगा जमुनी तहजीब के कारण नहीं हो रहा है। बल्कि पांच अगस्त का यह पावन दिन राम भक्तों की पच्चीस पीढ़ियों के पांच सौ साल के अथक संघर्ष, त्याग और बलिदान का सुफल है। राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों ने साम, दाम, दंड, भेद हर तरीके से राममनदिर निर्माण यज्ञ में विघ्न डालने की कोशिश की। सेक्युलरी चोला ओढ़े भगवान राम के इन बैरियों ने जनता के बीच, मीडिया, संसद औऱ न्यायालय सभी फोरम पर राममंदिर निर्माण के पुनीत कार्य को रोकने का हरसंभव प्रयास किया।

इन आस्तीन के सांपो ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई, राममंदिर की जगह किसी ने विद्यालय तो किसी ने शौचालय बनाने जैसे घटिया कुतर्क किए। राम मंदिर हेतु अधिग्रहीत भूमि के मूल्य पर प्रश्न चिन्ह खड़े किए और भी तमाम कुचक्र रचे, पग-पग पर रोड़े अटकाए। इन सिकुलरों के तमाम कुप्रयासों के बाद भी जब राममंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त होकर रहा, तो दिखावे के लिए ये परिवारवादी मजबूरी में रामनामी ओढ़ने का ढोंग कर रहे हैं। लेकिन इस स्वांग से इन कालनेमियों का चरित्र नहीं बदल जायेगा।

इसलिए किसी मुगालते में न रहें, इन रामद्रोहियों का असली चरित्र सनातन विरोधी ही है। साम्प्रदायिक सद्भाव और गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल मैं तब मानूँगा, जब मथुरा में भगवान कृष्ण मंदिर और काशी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण सर्वसम्मति से, बिना किसी अदालती हस्तक्षेप के हो सके। खैर, 05 अगस्त के इस ऐतिहासिक दिन पर राम मंदिर निर्माण यज्ञ में आहुति देने वाले ज्ञात-अज्ञात सभी रामभक्तों को सादर नमन।

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