कोलकाता। आजादी के महानायकों की गाथा इतिहास में परिपूर्ण नहीं है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिवीर जिनके इर्द-गिर्द आजादी की लड़ाई और क्रांतिकारियों के संघर्ष चलते रहे उन्हें इतिहास में जो जगह मिलनी चाहिए वह आज भी नहीं मिली है। इसलिए भारतीय शिक्षण मंडल ने पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्कूलों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्रवाद, समर्पण, विचारों और कार्यों के बारे में आने वाली पीढ़ियों को अवगत कराने का बीड़ा उठाया है। इसी के तहत संस्थान ने ऐसे लोगों को पंजीकृत करने के लिए आमंत्रित किया है।

जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित देश के क्रांतिकारियों के अवदानों के बारे में ऐतिहासिकता को अच्छी तरह से जानते समझते हैं। संस्थान की ओर से एक वेबसाइट जारी की गई है जो है। इस पर जाकर कोई भी व्यक्ति अपना पंजीकरण कर सकता है। एक दिसंबर के पहले तक पंजीकरण होगा। इसके बाद एक से 30 दिसंबर तक एक महीने भारत माता की सेवा में उस व्यक्ति को समर्पित करना होगा।

जो लोग पंजीकरण करवाएंगे उन्हें राज्य के विभिन्न जिलों में भेजा जाएगा जहां अधिकाधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों, मोहल्ला, बस्तियों में संपर्क कर शिक्षण मंडल तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संदेशों को प्रसारित करेंगे। कार्यक्रम का समापन 30 दिसंबर को होगा। 1943 में 30 दिसंबर को ही अखंड भारत में आजाद हिंद सरकार के प्रथम प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान में ध्वजारोहण किया था। इसी की स्मृति में राज्यभर के विभिन्न स्थानों पर भारत माता का पूजन होगा।

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