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ऑनलाइन गेमिंग विज्ञापन बनाम बुद्धिजीवी सेलिब्रिटी व्यक्तित्व

ऑनलाइन गेमिंग से समाज पर बढ़ते दुष्टपरिणाम को रेखांकित करना समय की मांग
ऑनलाइन गेमिंग का विज्ञापन, सेलिब्रिटी व सर्वोच्च भारतीय सम्मान से नवाजे बुद्धिजीवियों द्वारा करना, उनके व्यक्तित्व को शोभा नहीं देता – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। भारत ने एक ओर जहां चांद फतेह कर लिया है और शनिवार 2 सितंबर 2023 को सूर्य के सीक्रेट पता करने आदित्य एल1 मिशन को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है, जिसका काउंटडाउन शुक्रवार 11.50 बजे से ही शुरू कर दिया गया था और विजन 2047 का जोरदार आगाज चल रहा है, जिससे भारत की प्रतिष्ठा को चार चांद लग रहे हैं। वहीं घरेलू स्तर पर कुछ ऐसी स्थितियां आ जाती है जिसके बारे में हर भारतीय नागरिक को देशहित सर्वोपर की तर्ज पर सोचना होगा। विशेष रूप से हर क्षेत्र में भारत की सेलिब्रिटीज, हर क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण, पद्म विभूषण पानें वाले व्यक्तियों को विशेष रूप से सोचने के लिए रेखांकित होना होगा कि हमारी छोटी से छोटी असावधानी भी देश पर उंगली उठाने वालों की नजर में आ सकती है। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं कि अभी दो दिन पूर्व महाराष्ट्र के एक भारत रत्न से नवज़ितत व्यक्तित्व के घर के सम्मुख पूर्व मंत्री और विधायक सहित कुछ कार्यकर्ताओं ने धरना दिया, क्योंकि उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर विज्ञापन किया है।

जिससे प्रेरित होकर हजारों लाखों नागरिकों के इस गेमिंग में जाकर अपना जीवन बर्बाद करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है और सैकड़ो, लाखों लोगों ने अपना जीवन बर्बाद पहले ही कर दिया हो इससे इनकार नहीं किया जा सकता। इस बात पर शायद हत्याएं भी हुई हो, हालांकि इसके लिए शासन द्वारा भी ऑनलाइन गेमिंग को हतोत्साहित करने के लिए 30 प्रतिशत इनकम टैक्स, 28 प्रतिशत जीएसटी सहित कुछ कर लगाए हैं। परंतु जरूरत इसे पूर्ण रूप से बैन करने की है। इसलिए भारत रत्न से अलंकृत व्यक्तित्व को यह शोभा नहीं देता कि इस तरह की विज्ञापन करें, जिसे रेखांकित करना जरूरी है। इसलिए देश की नजर उस विधायक और पूर्व मंत्री के धरने पर गई। हालांकि हम टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर देखते भी हैं कि कई बॉलीवुड के नामी सितारों द्वारा भी इस ऑनलाइन गेमिंग का विज्ञापन अभी भी जारी है।

हालांकि इसमें कोई कानूनी रूकावट या बाध्यता नहीं है परंतु राष्ट्रीय हित सर्वोपरि की तर्ज पर ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा ऐसा विज्ञापन करना शोभा नहीं देता। हालांकि इसके पूर्व इस विधायक पूर्वमंत्री द्वारा महाराष्ट्र के माननीय सीएम को इसपर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध भी किया है। अब अनेकों स्थानों शहरों से देखने व सुनने को मिल रहा है कि इन प्रतिष्ठित सेलिब्रिटी और व्यक्तियों द्वारा किए गए विज्ञापन के खिलाफ़, कटोरा लेकर भीख मांगो आंदोलन शुरू किया गया है, कहीं तैयारी शुरू है, कहीं आंदोलन शुरू है। हमारे गोंदिया नगरी में भी भीख मांगो आंदोलन की तैयारी कुछ सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे हैं। चूंकि ऑनलाइन गेमिंग का विज्ञापन सेलिब्रिटी व सर्वोच्च सम्मान से नवाजे बुद्धिजीवियों द्वारा करना उनके व्यक्तित्व को शोभा नहीं देता, कहीं ना कहीं राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना को ठेस पहुंचती है। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे, ऑनलाइन गेमिंग विज्ञापन बनाम बुद्धिजीवी सेलिब्रिटी व्यक्तित्व।

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एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी : संकलनकर्ता, लेखक, कवि, स्तंभकार, चिंतक, कानून लेखक, कर विशेषज्ञ

साथियों बात अगर हम ऑनलाइन गेमिंग विज्ञापनकर्ता एक भारत रत्न के घर पर प्रदर्शन की करें तो, प्रदर्शन करने वाले विधायक नेता ने कहा, ऑनलाइन गेमिंग के विज्ञापन भावी पीढ़ी पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं। ऑनलाइन गेमिंग के कारण आत्महत्याएं और हत्याएं हुई हैं। इसलिए भारत रत्न होने के बावजूद इस तरह के विज्ञापन करना उनको शोभा नहीं देता। राज्य मंत्री रहे नेता ने कहा, एक क्रिकेटर के रूप में हमें उनपर पर गर्व है, लेकिन अगर वह भारत रत्न के रूप में ऐसे विज्ञापन करेंगे तो यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अपील करते हुए कहा, किसी को भी ऑनलाइन गेमिंग का विज्ञापन नहीं करना चाहिए। इसकी वजह से गरीब, मध्यमवर्गीय समाज तबाह हो रहा है। कई राज्यों ने इस तरह के गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया है। हम मुख्यमंत्री से भी अनुरोध करेंगे कि महाराष्ट्र में भी ऑनलाइन गेम पर बैन लगाया जाये।

कुछ दिन पहले, उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था और यहां तक ​​​​कि मांग की थी कि अगर वह ऑनलाइन गेमिंग जैसी अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना जारी रखते हैं तो देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न वापस ले लिया जाना चाहिए। उन्होंने उनको चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने तुरंत ऑनलाइन गेमिंग विज्ञापनों में दिखना बंद नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बॉलीवुड की एक टॉप फिल्मी सेलिब्रिटी ने कुछ दिनों पहले ऐसे एक ऐप का विज्ञापन किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऐसे विज्ञापन से समाज और युवाओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है। खासकर जब मशहूर हस्‍त‍ियां इन्‍हें सपोर्ट करती हैं, तो युवा ज्‍यादा प्रभावित होते हैं। नास‍िक में भी एक सेलिब्रिटी के ख‍िलाफ प्रदर्शन का बीते द‍िनों ऐसा ही एक वीडियो आया था। जहां एक शख्‍स ने विरोध प्रदर्शन का अनूठा तरीका निकाला। एक अन्य फिल्मी सेलिब्रिटी ने भी ऑनलाइन गेमिंग का विज्ञापन किया है। इसके विरोध में इस शख्‍स ने स्‍कूटर पर बैठकर एक्‍टर के लिए भीख मांगो आंदोलन शुरू किया। जिसकी अब अनेक नगरों शहरों में करने की तैयारी चल रही है।

साथियों बात अगर हम सरकार द्वारा ऑनलाइन गेमिंग को हतोत्साहित करने के लिए भारी टैक्स लगाने की करें तो, सरकार ने हाल ही में लोगों द्वारा ऑनलाइन गेम खेलने से जीते गए पैसे पर 30 प्रतिशत टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लगाया था। अब, उन्होंने उन गेम के कुल मूल्य पर 28 प्रतिशत का जीएसटी नाम का एक और टैक्स जोड़ दिया है। उच्च टैक्स रेट का मतलब है कि खिलाड़ियों को अपने गेमिंग खर्चों के लिए 28 प्रतिशत ज्यादा भुगतान करना होगा। इसमें खेल में चीज़ें खरीदना टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए पेमेंट करना और सब्सक्रिप्शन के लिए पेमेंट करना जैसी चीज़ें शामिल हैं। अभी, ऑनलाइन गेमर्स और पोकर खिलाड़ियों को गेमिंग कंपनी द्वारा ली जाने वाली फीस के अलावा, दांव लगाने या जीतने वाले पैसे पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं देना पड़ता था। लेकिन नई सिफ़ारिश के साथ, उन्हें प्रत्येक दांव के कुल मूल्य पर सीधे 28 प्रतिशत कर का भुगतान करना होगा।

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इसलिए ऑनलाइन गेम और पोकर खेलने के लिए उन्हें ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। अब, खिलाड़ियों को तीन चीज़ें चुकानी होंगी : पहला, खेल में कुल धनराशि पर 28 प्रतिशत कर। दूसरा, वे जो पैसा जीतते हैं उस पर 30 प्रतिशत टीडीएस टैक्स लगता है और तीसरा, गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म भाग लेने के लिए अपनी फीस लेगा। इसलिए गेम खेलने पर खिलाड़ियों को अलग-अलग तरीकों से अधिक पैसे चुकाने होंगे। अंकित मूल्य पर 28 प्रतिशत कर लागू करने के बाद, दांव के विजेता को 100 रुपये- 28 रुपये (100 रुपये का 28 प्रतिशत)- 8.47 रुपये (प्लेटफ़ॉर्म शुल्क) = 63.53 रुपये प्राप्त होंगे। विजेता को 63.53 रुपये-50 रुपये = 13.53 रुपये का लाभ होगा। इसका मतलब है कि मुनाफा 66.17 प्रतिशत कम हो जाएगा। जीएसटी 28 रुपये है, जिसका मतलब है कि विजेता को टैक्स के कारण 28 रुपये कम मिलेंगे।

साथियों बात अगर हम आईटी अधिनियम 2021 की सख़्ती की करें तो, इसे अब लक्जरी आइटम माना जाएगा। इस नोटिफिकेशन के माध्यम से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को गेमिंग सामग्री प्लेटफार्मों और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए नीतियों को विनियमित करने की शक्ति मिल गई है, इससे पहले, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ऑनलाइन रियल मनी गेम को विनियमित करने के लिए आईटी नियम, 2021 में एक संशोधन जारी किया था, जहां यूजर्स को खेलने के लिए पैसे का जोखिम उठाना पड़ता था। दरअसल सरकार मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के बढ़ते मामलों से परेशान है।वित्त मंत्रालय की तरफ से मुख्य तौर पर साइबर क्राइम के चार तरीके के मामले सामने आए हैं, इसके अनुसार पहला मामला क्रिप्टोकरेंसीज, दूसरा मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग है। इसके अलाव म्युल अकाउंट्स और कर्ज देने वाले एप के जरिए लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है।

ऑनलाइन मीडिया को विनियमित करने का कदम पहली बार मार्च 2018 में तत्कालीन आईबी मंत्री द्वारा शुरू किया गया था जोकि ऑनलाइन स्थान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 द्वारा शासित है। विदेशों से ऑपरेट हो रही ऑनलाइन कंपनियों को जीएसटी के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकेगा। टैक्स अथॉरिटीज के पास नियम ना मानने वाली कंपनियों पर बैन लगाने का भी अधिकार होगा। केंद्र ने ऑनलाइन गेमिंग सेवाओं और ऑनलाइन विज्ञापनों सहित सर्विस प्रोवाइडर्स को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने का आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ‘ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडर्स/प्रकाशकों द्वारा उपलब्ध कराई गई फिल्में और ऑडियो-विजुअल कार्यक्रम/कंटेंट को भारत सरकार की दूसरी अनुसूची (व्यवसाय का आवंटन) नियम, 1961 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय शीर्षक के तहत लाया जाएगा।

साथियों बात अगर हम सट्टाबाजी, जुआ ऑनलाइन गेमिंग की गतिविधियों को समझने की करें तो, कई राज्य कानूनों में सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा हुआ है, वहीं स्किल से जुड़े कुछ गेम्स को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने कई फैसलों में संवैधानिक रूप से जायज माना गया है। इस कानूनी परिदृश्य में, भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग ने हाल के दिनों में भारी तरक्की देखी है। हालांकि, इस मौजूदा कानूनी परिदृश्य के बावजूद बीते कुछ वर्षों में इस उद्योग से विभिन्न सामाजिक और आर्थिक चिंताएं उभरकर सामने आई हैं।बच्चों और वयस्कों के बीच लत से जुड़ी चिंताओं के मद्देनजर यूज़र को होने वाले नुकसान, खासकर ऐसी लत के कारण वयस्क यूजर्स को हुए वित्तीय नुकसान;हिंसक या अनुचित सामग्री के चित्रण के लिहाज से कॉन्टेंट से जुड़ी चिंताएं, क्योंकि बच्चों को ऐसी सामग्री या रियल मनी गेम्स तक पहुंचने से रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं हैं;जुए और सट्टेबाजी की विदेशी वेबसाइटों के विज्ञापन भारतीय यूजर्स को निशाना बना रहे हैं। यूजर्स के पैसे की सुरक्षा के लिए सुरक्षा उपायों की कमी है और किसी सख्त केवाईसी तंत्र के अभाव में मनी लॉन्ड्रिंग संबंधी चिंताएं हैं। विनियमित करने के लिए आईटी नियम, 2021 में एक संशोधन जारी किया है।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि ऑनलाइन गेमिंग विज्ञापन बनाम बुद्धिजीवी सेलिब्रिटी व्यक्तित्व। ऑनलाइन गेमिंग से समाज पर बढ़ते दुष्परिणाम को रेखांकित करना समय की मांग। ऑनलाइन गेमिंग का विज्ञापन, सेलिब्रिटी व सर्वोच्च भारतीय सम्मान से नवाजे बुद्धिजीवियों द्वारा करना, उनके व्यक्तित्व को शोभा नहीं देता है।

(स्पष्टीकरण : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार/आंकड़े लेखक के है। इस आलेख में दी गई सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई है।)

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