ओमिक्रोन : कांसेप्ट टू कॉम्बैट पर 263वां और 264वां आयुष समृद्धि इंटरनेशनल वेबिनार संपन्न

कोलकाता : इंडिपेंडेंट रिसर्च एथिक्स सोसाइटी ने ओमिक्रोन : कांसेप्ट टू कॉम्बैट पर 263वां आयुष समृद्धि इंटरनेशनल वेबिनार 7 दिसंबर शाम को ऑनलाइन वेबेक्स मीट पर देश-विदेश के विशिष्ठ आयुष चिकित्सकों संग मनाया। यह कार्यक्रम यूट्यूब पर भी लाइव हुआ और इमामी, झंडू, विश्व आयुर्वेद परिषद्, मेड फार्मा प्रो के सहयोग से सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के होस्ट डॉ. पवन कुमार शर्मा ने ईश्वर वंदना से कार्यक्रम शुरू किया और कहा कि कोरोना का म्युटेंट वैरिएंट ओमिक्रोन के केस बढ़ रहे हैं। पुरे विश्व भर में तो हम इसके बारे में आयुर्वेदा, यूनानी, सिद्धा और होमियोपैथी के विशेषज्ञों से जानते हैं।

प्रथम वक्ता के तौर पर प्रो. मदन थांगवेलु, यूरोपियन आयुर्वेद एसोसिएशन के प्रमुख, भूतपूर्व प्रो. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी UK को अपने इंट्रोडक्टरी प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया, फिर एक के बाद एक विशेषज्ञ चिकित्सकों जैसे प्रो. वि.के. अग्निहोत्री, स्वस्थ वृत्त डेप्ट, उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, हरिद्वार, डॉ. विष्णु प्रसाद शर्मा, भटपुरवा, प्रिंसिपल गौहाटी आयुर्वेदा कॉलेज, असम, डॉ. अश्विनी कुमार द्विवेदी, प्रो. होमियोपैथी, इंदौर, डॉ. जियाउर रहमान शैख़, असिस्टेंट प्रो., यूनानी कॉलेज, प्रयागराज, प्रो. चंद्र भूषण झा, रसशास्त्र डिपार्टमेंट, वाराणसी, प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति, आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद, नई दिल्ली, डॉ. स्वागथ एन. प्रो. कायाचिकित्सा, आगरा ने भी अपने विचार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में हुई कुछ महत्पूर्ण चर्चाएं : ओमिक्रोन नया वैरिएंट हैं और यह भी एक कारण है कि यह बहुत जल्दी फैल रहा है। फिर भी हमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है, परंतु पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। यह देखा जा रहा है कि कम उम्र वालों से लेकर सभी में संक्रमण फैल रहा है। जिन्होंने वैक्सीन ली हुई है उन्हें भी तथा जिन्हें पहले कोविड हो चुका है उन्हें भी यह अपने आगोश में ले रहा है। अभी तक अच्छी बात यह है कि यह काफी माइल्ड या हल्का है। अभी तक लंग्स इफेक्टेड निमोनिया नहीं मिले हैं और इससे मौत की संभावना कम लग रही है। परंतु यह संक्रामक रोग है। इसलिए कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना अर्थात मास्क पहनना, दूरिया रखना, इम्युनिटी बढ़ाना, स्वस्थ का पूरा ध्यान सभी को रखना होगा। स्टीम, नस्य, गरारे, इम्युनिटी बढ़ाने की आयुष सिस्टम औषधि ले। प्राणायाम तथा व्यायाम करें। जरूरत से ज्यादा डरना या घबराना नहीं है, सावधान रहें और अफवाहों से दूर रहे।

आयुष सिस्टम से एविडेंस रिपोर्ट दिखाया जाए। सारे विशेषज्ञों ने कहा कि आइए सब मिलकर ओमीक्रोन का मुकाबला करें। इस तरह के कीटाणु और वायरस सभी दौर में आते जाते रहते हैं। अभी विज्ञान के इस दौर में हम लेबोरेटरी टेस्टिंग से रोग को पकड़ पा रहे हैं, जैसे मौसम विभाग आने वाले आंधी, तूफ़ान या बरसात का अलर्ट देते हैं और अगर सावधानी बरती जाए तो नुकसान कम होगा। एक बात और की काढ़ा इत्यादि आयुर्वेद, होमियोपैथी, यूनानी, शिद्दा दवाएं खुद से न ले, उसे विशेषज्ञ चिकित्सक की देख-रेख में ही ले! ऐसा नहीं कि काढ़ा के बारे में कोई व्हाट्सएप या कही से भी सुनकर और ज्यादा या गलत मात्रा या अनुपात में लेकर दूसरी तकलीफ हो जाए या सही परिमाण हासिल न हो।

इस सफल कार्यक्रम के बाद आज IRES ने 264वां वेबिनार स्कोप एंड प्रैक्टिस इन थाईलैंड रखा, इसमें प्रमुख वक्ता डॉ. भोंपरापा स. थाईलैंड से जुड़े थे और भी बहुत से विशेषज्ञ देश और विदेश से भी जुड़े थे। इन सभी विशेषज्ञों को धन्यवाद देते हुए टीम ने एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की, आयुष हो सबके भले के लिए।

Shrestha Sharad Samman Awards

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

20 − 2 =