Laughter day

हंसी और प्रसन्नता मनुष्य की दुर्लभ पूंजी है

खिलखिलाते चेहरे और प्रसन्नता भरी आंखों की चमक मनीषियों की दुर्लभ पूंजी
प्रसन्नता हमारा ऐसा अनमोल ख़जाना है, जितना लुटाओगे उतना बढ़ता चला जाएगा – एडवोकेट किशन भावनानी

किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। कुदरत द्वारा रचित इस अनमोल खूबसूरत सृष्टि में रचनाकर्ता ने मानवीय जीवन में अनेक गुण दोषों को शामिल कर संजोया है, इसका उपयोग करने सर्वश्रेष्ठ बुद्धिमता का भी सृजन कर दिया है। बस!! जरूरत है अब माननीय जीव को उसे गुण-दोष सुख-दुख खुशियां-गम प्रसन्नता-दुख इत्यादि का चुनाव कर अपने जीवन को सफल और असफल बनाएं उसके ऊपर है!! क्योंकि प्रसन्नता और सुख दुख भी बौद्धिक क्षमता के आधार पर माननीय जीव को खुद चुनना होता है! इसलिए आज हम मन की प्रसन्नता पर उसके गुणों, प्रक्रिया सृजन करने के तरीकों पर इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे।

साथियों बात अगर हम प्रसन्नता की करें तो खुलकर हंसना, मुस्कुराना, प्रसन्न रहना, मन की प्रसन्नता खुद सृजित की हुई दवा के समान है, क्योंकि इसमें सब दुख तो नष्ट होते हैं। जीव अपने कर्म में असफल नहीं होता। बुद्धि तुरंत स्थिर रहती है। सामाजिक प्रतिष्ठा और गुणों की सुगंध दूर तक जाती है एक अलग हँसमुख व्यक्तित्व की हमारी छाया हमारे अपने परिचितों सहयोगियों पर पड़ती है। प्रसन्नता हमारा ऐसा अनमोल खजाना है। जिसे जितना लूटाएंगे उतना ही बढ़ता चला जाएगा, खिलखिलाते चेहरे और प्रसन्नता की आंखों की चमक मनीषियों को दुर्लभ पूंजी है। क्योंकि प्रसन्नता सुकून से जीने की कुंजी है। यह खजाना तब बढ़ता है जब हम दूसरों की खुशीयों में अपनी खुशी को समाहित करते हैं। हमें छोटी-छोटी चीजों में प्रसन्नता, सुख ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए। विश्वसनीय मन के भाव की खुशी का भाव अभूतपूर्व सफलता और दूरगामी सकारात्मक परिणाम होता है। आध्यात्मिकता, उदारता, परोपकार, सहनशीलता, सहिष्णुता इत्यादि मन की प्रसन्नता के प्रमुख स्त्रोतों में से कुछ हैं, जिनको जीवन में अपनाने की जरूरत को रेखांकित किया जा सकता है।

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एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी : संकलनकर्ता, लेखक, कवि, स्तंभकार, चिंतक, कानून लेखक, कर विशेषज्ञ

साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस, संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी विश्व प्रसन्नता इंडेक्स रिपोर्ट इत्यादि अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर प्रसन्नता के मूल्यों की करें तो प्रसन्नता को हाई वैश्विक टॉनिक माना जाता है। प्रसन्नता दिवस मनाया जाता है अलग-अलग देशों के प्रसन्नता से रहने के क्रमांक बताए जाते हैं, परंतु बहुत हैरानी की बात है प्रसन्नता इंडेक्स में अनेक पूर्ण विकसित देशों के साथ ही भारत भी पिछड़ा हुआ है जो रेखांकित करने वाली बात है!! विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट 2022 में 146 देशों की रिपोर्ट के अनुसार फिनलैंड लगातार 5 वर्षों से प्रथम और डेनमार्क द्वितीय और आयरलैंड तृतीय स्थान पर है।जबकि इस रिपोर्ट में भारत 136 वी रैंक पर है याने लास्ट टॉप टेन इतनी ख़राब हालात जो आश्चर्य वाली बात है।
साथियों बात अगर हम मन की प्रसन्नता के गुण एवं लाभों की करें तो, प्रसन्नता तो व्यक्ति का मानसिक गुण है, जिसे व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन के अभ्यास में लाना होता है।

प्रसन्नता व्यक्ति के अंतर्मन में छिपे उदासी, तृष्णा और कुंठाजनित मनोविकारों को सदा के लिए समाप्त कर देती है। वस्तुत: प्रसन्नता चुंबकीय शक्ति संपन्न एक विशिष्ट गुण है। प्रसन्नता दैवी वरदान तो है ही, यह व्यक्ति के जीवन की साधना भी है। व्यक्ति प्रसन्न रहने के लिए एक खिलाड़ी की भांति अपनी जीवन-शैली और दृष्टिकोण को अपना लेता है। उसके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता-असफलता, जय-पराजय, और सुख-दुख उसके चिंतन का विषय नहीं होता। वह तो अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ता जाता है।प्रसन्नता मानवों में पाई जाने वाली भावनाओं में सबसे सकारात्मक भावना है। इसके होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं: अपनी इच्छाओं की पूर्ति से संतुष्ट होना। अपने दिन-रात के जीवन की गतिविधियों को अपनी इच्छाओं के अनुकूल पाना। किसी अचानक लाभ से लाभांवित होना। किसी जटिल समस्या का समाधान प्राप्त होना।

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साथियों बात अगर हम प्रसन्नता के लक्ष्यों की प्राप्ति की करें तो, प्रसन्न रहने वाला व्यक्ति परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त कर लेता है। यदि वह असफल भी हो जाता है तो निराश होने और अपनी विफलता के लिए दूसरों को दोष देने की अपेक्षा अपनी चूक के लिए आत्मनिरीक्षण करना ही उचित समझता है। ज्ञानीजन और अनुभवी बताते हैं कि प्रसन्नता जैसे दैवीय-वरदान से कुतर्की और षड्यंत्रकारी लोग सदैव वंचित रह जाते हैं। प्रसन्न व्यक्ति स्वयं को प्रसन्न रखकर दूसरों को भी प्रसन्न रखने की अद्भुत सामर्थ रखता है। प्रसन्नता को प्रभु-प्रदत्त संपदा समझने वाले व्यक्ति ही सदैव सुखी रहते हुए यशस्वी, मनस्वी, महान और पराक्रमी बनकर समाज और राष्ट्र के लिए आदर्श स्थापित करने में सक्षम हो सकते हैं।

प्रसन्नता ही सुखी जीवन का मूल मंत्र है। प्रसन्नता हमारा अनमोल खजाना है। प्रसन्नता को जरूर लुटाइए फ़िर देखिए, उसका खजाना बढ़ता चला जाएगा। भलाई करना कर्त्तव्य नहीं, आनन्द है। क्योंकि वह प्रसन्नता को पोषित करता है। सबको प्रसन्न करने की शक्ति सब में नहीं होती। प्रसन्नता आत्मा को शक्ति प्रदान करती है। प्रसन्नतापूर्वक उठाया गया बोझ हल्का महसूस होता है। प्रसन्नता शब्द का प्रयोग मानसिक या भावनात्मक अवस्थाओं के संदर्भ में किया जाता है, जिसमें संतोष से लेकर तीव्र आनंद तक की सकारात्मक या सुखद भावनाएं शामिल हैं। इसका उपयोग जीवन संतुष्टि, व्यक्तिपरक कल्याण, यूडिमोनिया, उत्कर्ष और कल्याण के संदर्भ में भी किया जाता है इसलिए हर व्यक्ति ने इस गुण को अपने में समाहित कर जीवन को सफल बनाने के मंत्र को अपनाना चाहिए।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ हंसमुख व्यक्तित्व सूचित करें। खिलखिलाते चेहरे और प्रसन्नता भरी आंखों की चमक मनीषियों की दुर्लभ पूंजी। प्रसन्नता हमारा ऐसा अनमोल ख़जाना है, जितना लुटाओगे उतना बढ़ता चला जाएगा।

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