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कुण्डलिया
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जनता के दुख-दर्द को, खूँटी पर दो टाँग।
वोट चोट पर माँग लो, आगे कर दो टाँग।।
आगे कर दो टाँग, फँसा दो बढ़ते रथ में।
जीत न जाय विकास, अड़ा दो उसके पथ में।।
वही कुएँ में जाय, खाइयाँ जो है खनता।
भोली तो है किन्तु, जानती सबकुछ जनता।।
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जनता के दुख-दर्द को, खूँटी पर दो टाँग।
वोट चोट पर माँग लो, आगे कर दो टाँग।।
आगे कर दो टाँग, फँसा दो बढ़ते रथ में।
जीत न जाय विकास, अड़ा दो उसके पथ में।।
वही कुएँ में जाय, खाइयाँ जो है खनता।
भोली तो है किन्तु, जानती सबकुछ जनता।।