कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना ज़िले की बैरकपुर संसदीय सीट से सांसद अर्जुन सिंह के तृणमूल कांग्रेस में लौटने से दलबदल और बग़ावत से जूझ रही भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। अर्जुन सिंह की गिनती राज्य के कद्दावर नेताओं में होती है। ख़ासकर जूट मिल इलाक़े के हिंदी भाषियों में उनकी मज़बूत पैठ मानी जाती है। बता दें कि अर्जुन सिंह ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। वो रविवार को तृणमूल कांग्रेस महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी और उत्तर 24-परगना ज़िले के पार्टी नेताओं की मौजूदगी में टीएमसी में शामिल हुए थे। वो प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष भी थे।

उनकी वापसी की अटकलें बीते कुछ दिनों से लगाई जा रही थीं अब रविवार को वे अभिषेक बनर्जी समेत अन्य टीएमसी नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने घर वापसी की। इससे पहले वे जूट नीति पर वे केंद्र सरकार की आलोचना और ममता बनर्जी सरकार की सराहना कर रहे थे। रविवार सुबह बैरकपुर से कोलकाता रवाना होने से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मैं तो बीजेपी में रहना चाहता हूं लेकिन बीजेपी मुझे रख नहीं पा रही है। राजनीति में कोई भी फ़ैसला आख़िरी नहीं होता।” अर्जुन सिंह के पुत्र बीजेपी के टिकट पर विधायक हैं। ऐसे में देर-सबेर उनकी वापसी भी तय मानी जा रही है।

अर्जुन सिंह के बीजेपी में जाने के बाद बैरकपुर इलाक़े में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच हिंसक झड़पें बढ़ गईं थी। बीते विधानसभा चुनाव में भी उस इलाक़े में हिंसा हुई थी। उन्हें पार्टी में वापस लाने से पहले ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उत्तर 24-परगना ज़िले के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी। उसके कुछ देर बाद ही अर्जुन सिंह भी अभिषेक बनर्जी के दफ़्तर पहुंचे और वहां पुराने गिले-शिक़वे भुलाकर पार्टी का दामन थाम लिया।अभिषेक बनर्जी ने पार्टी में उनका स्वागत किया इस मौक़े पर राज्य के मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

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