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अटेंशन प्लीज! सभी जिला प्रशासनों को कानूनी शर्तों के पालन की सख्त जांच अभियान चलाना समय की मांग

प्रशासकीय लापरवाही से दुर्घटनाओं, अग्निकांडों में मासूमों की मौत कब तक?
प्रशासन ने पूरे भारत में अस्पतालों प्रतिष्ठानों व अन्य सेंटरों का लाइसेंस, फर्जी संचालन, अनक्वालिफाइड डाक्टरों की भरमार को रेखांकित कर कार्रवाई करना जरूरी- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। वैश्विक स्तर पर जहां एक ओर प्रौद्योगिकी का तेजी से विस्तार हुआ है, वहीं मानवीय लापरवाही, कुप्रशासन, लीपापोती, मिस मैनेजमेंट इत्यादि कमियां तेजी से बढ़ती जा रही है। जिसका सटीक उदाहरण गुजरात के गेमजोन व दिल्ली के बेबी केयर हॉस्पिटल में लगी आग के रूप में देखा जा सकता है। क्योंकि दोनों स्थानों पर प्रशासकीय लापरवाही की पोल खुल गई है। एक में 28 तो दूसरे में सात मासूमों की दर्दनाक मौत हो गई है। दोनों में ही अनेक प्रशासकीय लापरवाइयां दर्ज की गई है। जहां अनेक संबंधित अधिकारियों को निलंबित व गिरफ्तार किया गया है, जांच सही दिशा में तेजी से शुरू है। मेरा मानना है कि आज अगर हम पूरे भारत में हर जिला स्तरीय प्रशासन को उनके जूरिडिक्शन में आने वाली अस्पतालों प्रतिष्ठानों संस्थाओं मॉल सिनेमाघर या देशी विदेशी मदिरा दुकानों तंबाकू स्थान सट्टा क्षेत्र के संस्थानों सहित अनेक प्रतिष्ठानों पर सख़्ती से जांच व सत्यापन अभियान चलाया जाए तो मेरा पूरा विश्वास है कि कुछ ही महीना में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों के चालान या फिर केस दर्ज करने के रूप में सामने आ जाएंगे, शर्त यह है की मलाई को पूर्ण रूप से नजर अंदाज करना होगा। क्योंकि अक्सर होता यह है कि यदि हम कहीं जांच, चेकिंग या रेड करने जा रहे हैं तो घर का भेदी लंका ढाए जैसी स्थिति हो जाती है। क्योंकि चंद मलाई के चक्कर में रेड की जानकारी लीक कर दी जाती है और कुछ समय के लिए सभी अवैध गतिविधियां हटा जाती है और रेड के समय हाथ में कुछ नहीं लगता। जिससे केस मजबूत नहीं होता और कोर्ट में धराशाई हो जाता है और अंत में आरोपी छूट जाते हैं।

यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैंनें अनेक प्रशासकीय विभागों में यह सब प्रचलन देख चुका हूं। इसलिए मैं चाहता हूं कि ऊपर से ही ऐसा सख्त आदेश निकले और मंत्री या उच्च अधिकारी लेवल पर रोज कहीं ना कहीं सरप्राइज चेकिंग की जाए और ऑन द स्पॉट संबंधित अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए। मेरी है अपील है कि 4 जून 2024 को लोकसभा का रिजल्ट आने के बाद जो सरकार बनेगी इसकी पहली कैबिनेट मीटिंग में ही सभी जिला अधिकारियों को यह निर्देश देने का प्रस्ताव पारित किया जाए कि कोई भी गलत गतिविधि अपने क्षेत्र में न होने दे व सभी संस्थाओं के लाइसेंस पात्रता क्वालिफिकेशनों का सख़्ती से सत्यापन कर बाकी को सस्पेंड कर दिया जाए, तो मेरा मानना है कि हम स्वर्ण भारत की ओर अग्रसर हो जाएंगे और दिल्ली अस्पताल व गुजरात गेम हाउस जैसे कांड देखने को नहीं मिलेंगे। चूंकि सभी जिला अधिकारियों ने अपने जूरिडिक्शन क्षेत्र में सख्त जांच अभियान चलाना समय की मांग है। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे, प्रशासन ने पूरे भारत में अस्पतालों, प्रतिष्ठानों व अन्य सेंटरों, लाइसेंस पंजीकरण संचालन, फर्जी संचालन, अनक्वालिफाइड डॉक्टर व्यक्तित्व की भरमार को रेखांकित कर कार्यवाही करना जरूरी है।

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साथियों बात अगर हम दिल्ली व गुजरात में प्रशासन की लापरवाही की करें तो इतनी खामियों के बावजूद चल रहा था अस्पताल –
(1) दिल्ली सरकार की तरफ से अस्पताल को लाइसेंस जारी किया गया था, इसकी समय सीमा 31/03/2024 को समाप्त हो चुकी है।
(2) समाप्त हो चुके लाइसेंस के हिसाब से केवल 5 बेड की अनुमति थी, लेकिन घटना के समय 12 नवजात भर्ती थे।
(3) यहां के डॉक्टर्स नवजात बच्चों की देखभाल/इलाज के लिए योग्य नहीं हैं, क्योंकि वे केवल बीएएमएस डिग्री धारक हैं।
(4) आग लगने की स्थिति में आपातकालीन स्थिति के लिए उक्त अस्पताल में कोई अग्निशामक यंत्र स्थापित नहीं था।
(5) किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में न्यू बोर्न चाइल्ड अस्पताल में कोई आपातकालीन निकास भी नहीं था।

दिल्ली सरकार का हेल्थ डिपार्टमेंट इसकी परमिशन देता है, लेकिन डॉक्टर अवैध तरीके से नर्सिंग होम चला रहा था। पहले यहां पांच बेड की इजाजत मिली थी, लेकिन कई बार 25 से 30 बच्चे तक भर्ती किए जाते थे। यहां से 32 ऑक्सीजन सिलेंडर भी बरामद किए गए हैं, जबकि पांच बेड के हिसाब से सिलेंडर होने चाहिए थे।हॉस्पिटल को दिल्ली अग्निशमन सेवा की तरफ से एनओसी भी नहीं दी गई थी। यहां तक कि आग बुझाने तक के कोई इंतजाम नहीं थे। हॉस्पिटल में अंदर आने और बाहर जाने का सही इंतजाम नहीं था। कोई इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं था। सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि बीएएमएस डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती थी, जो कि बच्चों के इलाज के लिए क्वालिफाइड नहीं थे। इस तरह से सारे नियम को ताक पर रखकर ये सेंटर चल रहा था। बताया जा रहा है कि इस हॉस्पिटल के चार ब्रांच हैं, जो कि दिल्ली के विवेक विहार, पंजाबी बाग, हरियाणा के फरीदाबाद और गुरुग्राम में चल रहे हैं। संचालक डाक्टर ने एमडी किया है, जबकि उसकी पत्नी एक डेंटिस्ट है। वो भी उसके साथ अस्पताल चलाने में मदद करती है। हदासे के वक्त मौजूद डॉक्टर भी बीएएमएस है, जो कि आग लगने के बाद बच्चों को बचाने की बजाए भाग गया था। ठीक वैसे ही गुजरात के शहर के टीआरपी गेम जोन में आग लगने के बाद 27 लोगों की मौत हो गई। इस मामले में दिनांक 27 में 2024 को हाईकोर्ट में 4 घंटे तक सुनवाई चली। हाईकोर्ट ने तमाम अधिकारियों को फटकार लगाई और जवाब मांगा है।

बता दें कि गेम जोन आरएमसी, पुलिस और सड़क एवं भवन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में चलता था। गेम जोन 2021से चालू है और तीन साल बाद मंजूरी मांगी गई। गेम जोन के पास फायर एनओसी तक नहीं था। निगम की नाक के नीचे बिना मंजूरी के गेम जोन चल रहा था। सवाल यह है कि बिना स्थानीय थाने की इजाजत के ऐसा गेम जोन कैसे चल सकता है। राजकोट घटना के बाद एएमसी, वीएमसी, एसएमसी ने भी नियमों की जांच शुरू की है। राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक एसआईटी का गठन किया है। अंतरिम रिपोर्ट आज या कल उपलब्ध होने की गारंटी है। गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि अग्नि सुरक्षा निकास, उपकरण कर सहित विवरण प्रदान करें। अग्नि सुरक्षा और गेम जोन मुद्दे पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट और भविष्य की योजना के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया गया। राजकोट पुलिस कमिश्नर को भी स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए गए जबकि 27 मई 2024 को देर रात्रि उनका तबादला कर दिया गया है। आयुक्तों को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले खेल क्षेत्रों की सूची देना अनिवार्य है। इसके साथ ही 3 जून तक कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना होगा। इस मामले में अब 6 जून को अगली सुनवाई होगी। कोर्ट ने कहा है कि राजकोट म्युनिसिपल कमिश्नर को कोई राहत नहीं दी जाएगी। ये हत्याकांड है, लापरवाही है याद रखिए। कोर्ट ने कहा कि अभी हम सस्पेंड कर सकते हैं, लेकिन जवाब देने के लिए अभी सस्पेंड नही कर रहे।

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साथियों बात अगर हम शनिवार दिनांक 25 मई 2024 को दिल्ली अस्पताल में लगी आग की करें तो, दिल्ली के एक हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हॉस्पिटल के डॉक्टरों की लापरवाही से हुए हादसे में सात बच्चों की जलकर मौत हो गई। यहां 12 नवजात बच्चे थे, जिनमें 5 बच्चों का इलाज चल रहा है। पुलिस ने इस अस्पताल के मालिक डॉक्टर और हादसे के वक्त मौजूद डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस की टीम इस घटना की जांच कर रही है। दिल्ली पुलिस ने हादसे के जिम्मेदार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 336, 304, 304ए और 308 के तहत मामला दर्ज किया है।

साथियों बात अगर हम प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी की करें तो हादसे की जिम्मेदारी किसकी? इस हादसे ने एक बार फिर एजेंसियों की नाकामी को उजागर करके रख दिया है। भारत में रिहायशी बिल्डिंगों में इस तरह की छोटी-छोटी नर्सरिया, अस्पताल मेडिकल सेंटर चल रहे हैं लेकिन उनमें नियमों का पालन हो रहा है कि नहीं, इसकी याद प्रशासन को तभी आती है, जब कोई हादसा हो जाता है। हर साल गर्मियों के दौरान ऐसी बड़ी घटनाएं सामने आती है, लेकिन उन्हें रोकने और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है। नतीजा ऐसे हादसों के रूप में बार-बार सामने आता है और उसके बाद एजेंसिया एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ती दिखाई देती है। हर मामलों में ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है। फायर एनओसी को लेकर भी एजेंसियों के अलग-अलग दावे सामनेआते रहें है। कई बार ऐसा भी होता है, हादसे के बाद बच्चे को अंदर ही छोड़कर स्टाफ के लोग बाहर निकलआते है। ऐसे लोगों के हवाले नवजात बच्चों को छोड़ा गया था अब मजिस्ट्रेट जांच कराई जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह हादसा रोका जा सकता था और पहले कार्रवाई करने की जिम्मेदारी किसकी थी?

साथियों बात अगर हम गुजरात गेमिंग झोंन में लगी आग की करें तो, गुजरात में राजकोट टीआरपी गेमिंग जोन में आग लगने से अब तक 28 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 12 बच्चे हैं। इस मामले में प्रशासन ने छह अधिकारियों को सस्पेंड किया है। राजकोट नगर निगम के दो अधिकारी असिस्टेंट इंजीनियर और टाउन प्लानर को सस्पेंड किया गया है, इसके साथ ही सड़क एवं निर्माण विभाग के दो अधिकारी एडिशनलइंजीनियर और डिप्टी इंजीनियर को भी सस्पेंड किया गया है। वहीं, पुलिस विभाग के दो अधिकारी पुलिस इंस्पेक्टर और पुलिस इंस्पेक्टर पर भी गाज गिरी है। इस बीच गुजरात के सीएम ने रविवार को राजकोट गेम जोन दुर्घटना स्थल पर जाकर निजी तौर पर निरीक्षण किया। इस गंभीर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही राज्य सरकार ने छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश दिया। टीआरपी गेम जोन में 1500 से 2000 लीटर डीजल जनरेटर के लिए, गो कार रेसिंग के लिए 1000 से 1500 लीटर पेट्रोल जमा था। जिसकी वजह से आग इतनी फैली और पूरा स्ट्रक्चर जल कर खाक हो गया। गेम जोन से बाहर निकलने और प्रवेश के लिए 6 से 7 फीट का एक ही रास्ता था। गेम जोन में एंट्री के लिए 99 रुपये की स्कीम थी जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग हादसे के वक्त गेम जोन में मौजूद थे।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि अटेंशन प्लीज! सभी जिला प्रशासनों को कानूनी शर्तों के पालन की सख्त जांच अभियान चलाना समय की मांग। प्रशासकीय लापरवाही से दुर्घटनाओं अग्निकांडों में मासूमों की मौत कब तक? प्रशासन ने पूरे भारत में अस्पतालों, प्रतिष्ठानों व अन्य सेंटरों का लाइसेंस फर्जी संचालन, अनक्वालिफाइड डाक्टरों की भरमार को रेखांकित कर कार्रवाई करना जरूरी है।

(स्पष्टीकरण : इस आलेख में दिए गए विचार लेखक के हैं और इसे ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है।)

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