नई दिल्ली। पैंगोंग लेक पर चीन की ओर से एक और पुल बनाए जाने की रिपोर्ट पर भारत ने कहा है कि वो स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा- हमने दूसरे पुल बनाने की रिपोर्ट देखी है। हमने हमेशा से यही कहा है कि ये क़ब्ज़ाया गया है। चीन के साथ बातचीत जारी है। अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन ने पैंगोंग झील के पार एक दूसरे पुल का निर्माण शुरू कर दिया है, जो भारी बख्तरबंद वाहनों को आवाजाही के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ख़बर के मुताबिक इससे पहले भी चीन इस इलाक़े में एक पुल बना चुका है जिसे भारत अपना हिस्सा बताता है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ दूसरे पुल का निर्माण पहले पुल के ठीक सामने ही किया जा रहा है। पहला पुल इसी साल अप्रैल में बनकर तैयार हुआ था। जब इस साल जनवरी में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ने वाले पहले पुल के निर्माण के बारे में रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा थी कि ये स्ट्रक्चर 60 सालों से चीन के अवैध कब्ज़े वाले इलाक़े में स्थित है।

भारत ने उस समय यही कहा था कि भारत ने इस तरह के अवैध कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है। दोनों पुल 134 किलोमीटर लंबी रणनीतिक झील के सबसे सँकरे हिस्से में स्थित हैं। पहला पुल पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दक्षिण में स्थित है, दोनों पुल उत्तरी तट पर चीनी सैनिकों की स्थिति और पूर्वी छोर पर रुतोग में पीएलए बेस की दूरी लगभग 150 किमी तक कम कर देंगे।

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