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कोलकाता : नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है, आइए जानते हैं इनकी पूजन विधि…
मां सिद्धिदात्री का पूजा मंत्र :
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैररमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।
नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ, सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहते हैं। यह देवी कमल के आसन पर विराजमान हैं और हाथों में कमल, शंख, गदा, सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं। सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्र के नौवें दिन अपने जीवन में यश, बल और धन की प्राप्ति के लिए की जाती है। सिद्धिदात्री देवी उन्हें सभी महाविद्याओं की अष्ट सिद्धियां भी प्रदान करती हैं जो सच्चे हृदय से उनकी आराधना करते हैं।
नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए नवाहन का प्रसाद, नवरस युक्त भोजन और नौ प्रकार के फल-फूल आदि का अर्पण करके जो भक्त नवरात्रों का समापन करते हैं उन्हें इस संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप हैं, जो श्वेत वस्त्रालंकार से युक्त महाज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती हैं।
नवरात्रि के नौवें दिन का शुभ रंग :
नवरात्रि की नवमी तिथि को बैंगनी या जामुनी रंग पहनना शुभ होता है। यह रंग अध्यात्म का प्रतीक होता है।
कन्या पूजन :
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करना अति उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि नवरात्रि के आखिरी दिन कन्या पूजन करने से मां सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं।
मां सिद्धिदात्री का भोग :
मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं।