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प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर योग प्रदर्शन एवं स्वास्थ्य जागरूकता समारोह सम्पन्न

उज्जैन। राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर शासकीय शिक्षा महाविद्यालय उज्जैन में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर प्राकृतिक चिकित्सा इकाई उज्जैन द्वारा समारोह का आयोजन किया गया जिसमें योग प्रदर्शन एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अतिथियों एवं पदाधिकारी द्वारा दी गई।

समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. राजीव पंड्या प्राचार्य शासकीय शिक्षा महाविद्यालय उज्जैन में अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी जी प्राकृतिक चिकित्सा प्रचार प्रसार के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से प्राकृतिक चिकित्सा दिवस का शुभारंभ 18 नवंबर 1945 को किया गया।

सारस्वत अतिथि एवं प्राकृतिक चिकित्सा के सदस्य डॉ. प्रभु चौधरी ने स्थापना दिवस के बारे में बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी देश में सभी मानव के लिए उपयोगी चिकित्सा जो प्रकृति के साथ चिकित्सा संभव हो सकती है इसके बारे में हमेशा प्रयासरत रहे।

महात्मा गांधी गांधी जी चाहते थे कि भारत की जनता स्वस्थ व स्वावलंबी बने तथा प्राकृतिक चिकित्सा का ज्ञान एवं जन-जन तक पहुंचे युवाओं में प्राकृतिक चिकित्सा योगासन ध्यान प्राणायाम आदि के प्रति जन जागरण करने हेतु कौन बनेगा स्वस्थ प्रतियोगिता भी की जाती है।

प्रतियोगिता में भाग लेने से विद्यार्थियों में खान-पान स्वस्थ जीवन शैली स्मरण शक्ति एकाग्रता उत्सव उमंग स्फूर्ति एवं सफलता के अनेक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। इस दिन को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस की घोषणा से संपूर्ण राष्ट्र में चिकित्सा के प्रति जन जागरूकता किया जाना है।

योगाचार्य डॉ. महेश पाटीदार ने प्राकृतिक चिकित्सा के लाभ एवं योग के द्वारा शरीर को कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है इसके बारे में बताएं साथ ही योग की विभिन्न क्रियाओं को प्रयोगात्मक करके दिखाया।

विशिष्ट वक्ता प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. मंजू श्री जायसवाल ने शरीर को मिट्टी पट्टी टब स्नान मसाज मालिश संतुलित भोजन कटी पट्टी उपवास सूर्य स्नान प्रार्थना से किसी भी बीमारी का इलाज किया जा सकता है।

समारोह की अध्यक्षता संस्था की अध्यक्ष डॉ. मधु नागर ने की। समारोह के विशिष्ट रूप से डॉ. सुनीता साहू, डॉ. उषा मकवाना, डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, ज्योति हरसोले आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किया।

समारोह का संचालन डॉ. मनीषा ठाकुर ने एवं आभार प्रदर्शन डॉक्टर डाली गिरी गोस्वामी ने किया। अंत में उपस्थित समस्त शिक्षार्थियों, शिक्षकों एवं अतिथियों को प्राकृतिक चिकित्सा चाय वितरित की गई।

इस अवसर पर कौन बनेगा स्वास्थ्य रक्षक विषय पर भी संदेश दिया। स्वस्थ भारत सुखी परिवार तथा प्राकृतिक चिकित्सा संबंधी प्रश्नों की प्रतियोगिता में पुरस्कार रूप में प्राकृतिक चिकित्सा की पुस्तक प्रदान की।

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