Vishwa kavita divas

विश्व कविता दिवस पर शब्दभूमि प्रकाशन की ऑनलाइन संगोष्ठी

  • ‘समकालीन कविता में सामाजिक परिवर्तन की चेतना’
  • विषय पर हुई गहन चर्चा, 22 वक्ताओं ने साझा किए विचार

कोलकाता, 24 मार्च 2026: विश्व कविता दिवस के अवसर पर शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा एक प्रभावशाली ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका केंद्रीय विषय ‘समकालीन कविता में सामाजिक परिवर्तन की चेतना’ रहा।

इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और रचनाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम की शुरुआत

संगोष्ठी की शुरुआत संचालिका डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी (हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा) द्वारा की गई। उन्होंने ‘विश्व कविता दिवस’ के इतिहास, वैश्विक महत्व तथा साहित्यिक परंपरा में कविता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि कविता केवल भावाभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतर्विरोधों को उजागर करने और परिवर्तन की चेतना जगाने का सशक्त साधन भी है।

वक्ताओं के विचार

संगोष्ठी में विभिन्न प्रदेशों से जुड़े वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रमुख वक्ता थे:

  • सपना चंदेल (शिमला)
  • जया कुमारी (पलामू)
  • शांति सोनी एवं प्रीति साहू (बिलासपुर)
  • प्रियंका सिंह (मुंबई)
  • शोभा डी. (मैसुरू)
  • डॉ. महेंद्र रणदा (धार)
  • डॉ. जया सुभाष बागुल (जालना)
  • नितिन सुभाषराव कुंभकर्ण (परभणी)
  • डॉ. मनोज प्रभाकर ढोने (वर्धा)
  • आनंद कुमार जैन (खंडवा)
  • डॉ. रुचि पालीवाल (उदयपुर)
  • अमन कुमार (गोड्डा)
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वक्ताओं ने रेखांकित किया कि समकालीन कविता केवल सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक अन्याय, असमानता, स्त्री-विमर्श, पर्यावरण संकट और मानवीय मूल्यों के क्षरण जैसे मुद्दों पर गहरी संवेदनात्मक हस्तक्षेप करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि कविता समाज की चेतना को झकझोरने और परिवर्तन की दिशा में प्रेरित करने का एक प्रभावी माध्यम बनी हुई है।

संगोष्ठी का समापन

संगोष्ठी के सफल आयोजन में प्रिया श्रीवास्तव ने संयोजक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सभी प्रतिभागियों के बीच समन्वय स्थापित किया। कार्यक्रम के अंत में विनोद यादव ने सभी वक्ताओं, श्रोताओं एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को साहित्यिक संवाद को समृद्ध करने और नई पीढ़ी में रचनात्मक चेतना जागृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

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