विश्व वंद्य भारत महान

जितेंद्र जैन

तेरहवी सदी में लिखे गए कोरियाई ग्रन्थ सम्यूक युसा के अनुसार भारत के अयोध्या प्रांत की राजकुमारी सूर्य रत्ना (सूरी रत्ना) का विवाह वहाँ के राज किम सुरो से हुआ, जिसके बाद उन्हें रानी हो हॉक आके कहा जाने लगा। कोरिया की लगभग 8 प्रतिशत आबादी आज भी स्वयं को महाराजा किम सुरो और महारानी हो का वंशज मानती है। इनकी संख्या कोरिया में लगभग आठ लाख के करीब मानी जाती है।

दक्षिण कोरिया के दूत शिन बोंग-किल ने अयोध्या को लेकर एक बड़ी बात कही है उनका कहना है कि अयोध्या और कोरिया का संबंध बेहद खास है। उन्होंने कहा कि राजा किम की समाधि स्थल से पुरातात्विक वस्तुओं में, अयोध्या से संबंधित कलाकृतियों को पाया गया है।
इस तरह भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या से दक्षिण कोरिया का गहरा संबंध है।
वर्ष 2018 को भी राम जन्म भूमि जन्म भूमि अयोध्या में दीपावली पर भव्य दीपोत्सव मनाया गया था क्योंकि इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति श्री मून जे इन की धर्मपत्नी श्रीमती किम जुंग सुक को आमंत्रित किया गया था। उनकी 4 से 7 नवम्बर 2018 भारत यात्रा में उनके साथ दक्षिण कोरिया का आधिकारिक प्रतिनिधि मंडल भी था।

भारतीय शास्त्रो में वर्णित इतिहास के अनुसार 2066 वर्षो पूर्व अर्थात ईसा पूर्व 48 में अयोध्या की राजकुमारी सूर्य रत्ना का विवाह कोरिया के सम्राट सुरो से हुआ था।
वहीँ दक्षिण कोरिया भी मानता है की अयोध्या की राजकुमारी 2 हजार वर्ष पूर्व समुद्र के रास्ते कोरिया पहुंची थी। यहां उन्होने राजकुमार किम सुरो से धूमधाम से विवाह रचाया था। राजकुमार और राजकुमारी के इस विवाह के कई प्रमाण आज भी दक्षिण कोरिया में मौजूद हैं।

चीनी कथाओं की मानें तो अयोध्या के राजा को रात में स्वप्न आया था, जिसमें उन्हें एक संदेश मिला कि राजकुमारी का विवाह कोरिया के राजकुमार किमसूरो से कराएं। बताया जाता है कि हवांग ओके और किमसूरो 150 वर्ष तक जीवित रहे।
इस विवाह के उपरान्त होने वाली संतानो को कारा वंश का नाम मिला और यहीं से कारा वंश की स्थापना हुई।
“कोरिया के लोगों में रानी “हो” याने राजकुमारी सूर्य रत्ना का दर्जा “राजमाता” का है।
वर्तमान में उनके वंशज किम नाम का प्रयोग करते हैं। लगभग दो हजार साल पहले हुई एक शादी ने भारत की धार्मिक नगरी अयोध्या का अटूट सम्बन्ध हजारों मील दूर दक्षिण कोरिया से स्थापित कर दिया। दक्षिण कोरिया और अयोध्या के बीच करीब 4300 किलोमीटर की दूरी है।

कोरिया के पूर्व राष्ट्रपतियों में ली माइक बंग, किम दे जुंग, किम यांग सेम और पूर्व प्रधानमन्त्री किम जोंग पील भी स्वयं को इसी राजवंश का वंशज मानते है, ये रिश्ता बताते हुए वे बेहद गर्व से भर जाते है।
इसी संबंध के चलते दक्षिण कोरिया आज भी अयोध्या से गहरा रिश्ता बनाए हुए है और भारी संख्या में कोरियाई लोग अपनी पौराणिक जड़े तलाशने अयोध्या यात्रा पर हर वर्ष फरवरी मार्च में आते है।
कोरियाई विश्वद्यालय के प्रोफेसर बुंग मो किम का कहना है कि “क्वीन Heo भारत के अयोध्या की बेटी थी, इस हिसाब से अयोध्या की भूमि हमारे लिए मां के जैसी ही हुई इसीलिए कोरिया के लोग अयोध्या को अपना ननिहाल तथा मातृभूमि समझते हैं और भारत आते हैं।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच मजबूत व्यापारिक सम्बन्ध है, लेकिन व्यापारिक संबंध के साथ-साथ ये भावनात्मक संबंध भी कम मजबूत नहीं।
प्रधनमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान मौजूदा स्मारक को भव्य स्वरुप देने पर सहमति बनी थी और उसी के अनुसार श्रीमती किम अयोध्या में राजकुमारी सूर्य रत्ना के स्म्रति में बनाये जाने वाले भव्य स्मारक की आधार शीला रखी थी।

2014 तक सारी दुनियाँ में उपेक्षित भारत से आज हर देश अपने मधुर और प्रगाढ़ संबंधो की दुहाई दे रहा है ये चमत्कार है नरेंद्र मोदी के स्वाभिमानी कुशल नेतृत्व और दूर दृष्टि भरे सोच का।
अगर मुखिया स्वाभिमानी , ईमानदार और सर्व जन सुखाय सर्व जन हिताय का सोच रखने वाला हो तो उस परिवार, समाज या देश का सभी सम्मान करेंगे।

चित्र -1 कोरिया में राजकुमारी सूर्य रत्ना की मूर्ति।
चित्र -2 कोरिया के महाराज राजा किम सुरो और महारानी हो हॉक (राजकुमारी सूर्य रत्ना) की प्रतिमा और चित्र।
चित्र -3 राजकुमारी सूर्य रत्ना का स्वास्तिक पेंडल
चित्र -4 राजकुमारी सूर्य रत्ना के स्वयं के पास रखी शीला पर अंकित दो मछलियाँ जो उत्तर प्रदेश सरकार के राजकीय चिन्ह में भी अंकित है।

जितेंद्र जैन

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