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बैरकपुर राष्ट्रगुरु सुरेंद्रनाथ कॉलेज में रिसर्च मेथाडोलॉजी पर कार्यशाला का आयोजन संपन्न

बैरकपुर। शुक्रवार को बैरकपुर राष्ट्रगुरु सुरेंद्रनाथ कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. मनोजित राय की प्रेरणा से कॉलेज के हिंदी, संस्कृत और उर्दू विभाग एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वाधान में रिसर्च मेथाडोलॉजी के ऊपर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहीं कल्याणी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ. विभा कुमारी। कार्यशाला में स्वागत वक्तव्य देते हुए हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बिक्रम कुमार साव ने कार्यक्रम का आरंभ किया।

तत्पश्चात विभाग के अध्यापक डॉ. सत्येंद्र पांडे ने विषय विशेषज्ञ का परिचय प्रस्तुत किया एवं आईक्यूएसी के कोऑर्डिनेटर डॉ. सुतपा घोष दस्तीदार और कॉलेज के बरसर डॉ. देवाप्रसाद सरकार द्वारा प्रोफेसर विभा कुमारी को सम्मानित किया गया। आईक्युएसी के कोऑर्डिनेटर के संबोधन के पश्चात विषय विशेषज्ञ का व्याख्यान आरंभ हुआ।

अपने व्याख्यान सत्र में विषय पर बात रखते हुए प्रोफेसर विभा कुमारी ने शोध के विविध आयामों पर आलोकपात किया। उन्होंने शोध प्रक्रिया में विचार करने के तर्कसंगत ढ़ंग, विशेषज्ञ और संपूर्ण उपचार, खोज और समाधान, शुद्धता, विश्लेषण, तथ्यों का आपस में रिश्ता, महत्वपूर्ण आलोचनात्मक अवलोकन, ईमानदारी और कठिन परिश्रम पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

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अनुसंधान और शोध की व्युत्पत्तिपारक व्याख्या करते हुए उन्होंने शोध की परिभाषा,शोध के गुण जैसे जिज्ञासा, निरीक्षण, परीक्षण, व्याख्या और विश्लेषण, अध्ययन की वैज्ञानिकता तथा तटस्थता जैसी बिंदुओं पर गंभीर चर्चा प्रस्तुत की।

शोध की सृजनात्मकता पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा- “सृजनात्मकता के प्रक्रियाओं के आधार पर विज्ञान अंततः कला है कला अंततः विज्ञान है।” उन्होंने अपने व्याख्यान में शोध के सोपान, शोधार्थी के गुण, शोध की चुनौतियां, बाधाओं और सीमाओं पर विशद व्याख्यान प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के बरसर ने कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और संस्कृत विभाग के अध्यापक डॉ. देवेश सरकार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम में हिंदी, उर्दू, संस्कृत विभाग के अध्यापक, विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहें। कार्यशाला का कुशल संचालन डॉ. सत्येंद्र पांडेय द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में अध्यापक डॉ. अब्दुल्ला, डॉ. पीयूष नंदी, डॉ. मरणबंधु मजूमदार एवं अध्यापिका डॉ. सलमा खातून, पायल मान्ना, माधुरिमा मुखर्जी का सहयोग सराहनीय रहा।

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