स्पंज आयरन कारखाने से उठती काली धूल पर सख्त कार्रवाई की मांग, एसडीएम को सौंपा गया सबूतों सहित ज्ञापन
सुभाष लाल, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर में हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है। शहर के एक स्पंज आयरन कारखाने से निकलने वाली काली सिलिकॉन धूल ने आम जनजीवन को गंभीर संकट में डाल दिया है।
सबसे अधिक मार बच्चों और महिलाओं पर पड़ रही है। सर्दी, खांसी, बुखार, एलर्जी और सांस की बीमारियां यहां आम होती जा रही हैं।

इसी भयावह हालात के खिलाफ मंगलवार को खड़गपुर की महिलाओं ने चुप्पी तोड़ते हुए उप-जिला मजिस्ट्रेट (एसडीओ) सुरभि सिंगला को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। यह सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि सबूतों से भरा आरोपपत्र था।
प्रतिनिधिमंडल ने कारखाने से निकलने वाली काली धूल के नमूने, प्रभावित बच्चों के इलाज कर रहे डॉक्टरों के नाम व संपर्क विवरण, बच्चों के पैरों पर जमी काली परत की तस्वीरें, सूखती पेड़ों की जड़ें और हालिया AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) के आंकड़े प्रशासन के सामने रखे।
ज्ञापन में मांग की गई कि सर्दी के मौसम में कारखाने को प्रदूषण नियंत्रण के ठोस और प्रभावी उपाय लागू करने के लिए बाध्य किया जाए।
काली सिलिकॉन धूल की वैज्ञानिक जांच कर उसकी रिपोर्ट उप-जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सार्वजनिक की जाए तथा प्रभावित इलाकों में स्थायी AQI मापने वाली मशीनें लगाई जाएं।
महिला प्रतिनिधिमंडल में कंचना रॉय, शहनाज खातून, बरनाली महापात्रा, अंबिका दास सहित कई स्थानीय महिलाएं शामिल थीं।
उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं बदले, तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं प्रशासन के सामने जाकर उठाए गए कदमों की समीक्षा करेंगी।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिल्ली के प्रदूषण पर राष्ट्रीय बहस होती है, लेकिन खड़गपुर की जहरीली हवा पर राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि खामोश हैं।
अब उम्मीदें प्रशासन से जुड़ गई हैं कि माताओं की यह पुकार महज कागज़ों तक सीमित न रह जाए, बल्कि जमीन पर सख्त कार्रवाई के रूप में दिखाई दे।
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