तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत शालबनी प्रखंड के भादूतला क्षेत्र स्थित निश्चिंतिपुर में एक दिन ऐसा रहा, जब शब्दों में केवल चर्चा नहीं, बल्कि जागरूकता की रोशनी थी। अनिंदिता कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन के प्रांगण में आयोजित महिला सशक्तिकरण संगोष्ठी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि परिवर्तन की शुरुआत शिक्षा से होती है और उसकी शक्ति आत्मनिर्भरता से।
कार्यक्रम में District Legal Services Authority (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) के उपमुख्य विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता अंकुर कर्मकार एवं सहायक विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता शुभम पांडेय ने उपस्थित छात्राओं को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों से अवगत कराया।
उन्होंने सरल शब्दों में बताया कि कानून केवल पुस्तकों में लिखी धाराएँ नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़ी होने वाली ढाल है और यह ढाल हर महिला के लिए उपलब्ध है।

मेदिनीपुर महिला थाना की प्रभारी अधिकारी आजिजा खातून ने सुरक्षा, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और प्रशासनिक सहयोग की जानकारी देते हुए छात्राओं को निर्भीक बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि चुप्पी समस्या को बढ़ाती है, जबकि जागरूकता समाधान का मार्ग खोलती है।
महाविद्यालय के प्रभारी शिक्षक प्रोफेसर पुष्पेन्द्र कामिल्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब नारी शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती है, तो वह केवल अपने जीवन की दिशा नहीं बदलती, बल्कि परिवार और समाज दोनों को प्रगति के पथ पर अग्रसर करती है। शिक्षा नारी को आत्मविश्वास देती है, और आत्मनिर्भरता उसे निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है।
संगोष्ठी के दौरान छात्राओं की सक्रिय सहभागिता और प्रश्न–उत्तर सत्र ने कार्यक्रम को संवादात्मक और प्रभावशाली बना दिया।
इस तरह यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सोच में परिवर्तन और सशक्त भविष्य की ओर एक सार्थक कदम सिद्ध हुआ।
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