आरएसएस शताब्दी पर पद्मपुखुरी में साधना, संगठन और सनातन का संगम
तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पूर्व मेदिनीपुर जिला अंतर्गत कांथी का पद्मपुखुरी आज केवल एक इलाका नहीं, बल्कि सनातन चेतना का जीवंत मंच बन गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना शताब्दी के अवसर पर यहां आयोजित हिंदू धर्म सम्मेलन में यज्ञ की अग्नि, गीता के श्लोक और साधु-संतों के वचनों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हजारों श्रद्धालु, एक स्वर, एक भाव – पांच सहस्र कंठों से हुआ सामूहिक गीता पाठ इस आयोजन की सबसे प्रभावशाली झलक रहा।
यज्ञ से आरंभ, गीता पाठ पर चरम : सुबह से ही कांथी नगर सज-धज कर उत्सव का रूप ले चुका था। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ का आयोजन हुआ। पूर्णाहुति के बाद जब हजारों कंठों से गीता के श्लोक गूंजे, तो पद्मपुखुरी क्षेत्र मानो तपोभूमि में बदल गया।

हिरण्मय गोस्वामी महाराज का है संदेश – ‘सनातन जीवन पद्धति है’ : सम्मेलन के मुख्य वक्ता हिरण्मय गोस्वामी महाराज ने हिंदू समाज की एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि “हिंदू धर्म केवल एक आस्था नहीं, यह जीवन जीने की एक समग्र धारा है। समाज को मजबूत करने के लिए भेदभाव त्याग कर संगठित होना होगा।” उन्होंने सनातन मूल्यों को सहेजने और अगली पीढ़ी तक भारतीय संस्कृति का सही इतिहास पहुंचाने का आह्वान किया।
साधु-संतों और बुद्धिजीवियों की गरिमामयी उपस्थिति : मंच पर दीघा शारदा रामकृष्ण मिशन के स्वामी नित्यबोधानंद, वेद मंदिर नंदीग्राम के स्वामी सूर्यानंद सरस्वती, भक्तसेवा आश्रम श्रीरामपुर के सनातन दास, जेएनयू के प्रोफेसर पार्थ विश्वास, श्रीश्री ओंकारनाथ आश्रम कांथी के दयाल हरि साउ सहित अनेक साधु-संत और विद्वान मौजूद रहे। संघ की ओर से गौरांग खाड़ा (विभाग सह-कार्यवाह) और पार्थ दास (कार्यवाह, कांथी जिला) ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एकता, संस्कृति और संगठन का आह्वान : वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में हिंदू समाज की भूमिका, सांस्कृतिक चेतना और आपसी एकजुटता पर विचार रखे। जाति-विभाजन से ऊपर उठकर संगठित समाज के निर्माण का संदेश बार-बार दोहराया गया।
शांति, अनुशासन और श्रद्धा के साथ समापन : पूरा आयोजन शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। यज्ञ की अग्नि, गीता के श्लोक और साधु-संतों के संदेश, कांथी पद्मपुखुरी में यह दिन सनातन स्मृति के रूप में दर्ज हो गया।
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