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चुनाव आयोग के नोटिस के बाद दो बुजुर्गों ने दी जान; बंगाल में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज

कोलकाता | 30 दिसंबर 2025: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जारी नोटिसों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। राज्य में दो बुजुर्ग मतदाताओं की मौत के बाद उनके परिजनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

परिजनों का आरोप है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की ओर से सुनवाई नोटिस मिलने के बाद दोनों मतदाता मानसिक तनाव में आ गए और इसी वजह से उन्होंने जान दे दी।

पुरुलिया में दर्ज हुई पहली शिकायत

शीर्ष चुनाव अधिकारियों के खिलाफ पहली शिकायत पुरुलिया जिले में दर्ज कराई गई है। यहां के रहने वाले 82 वर्षीय दुर्जन माझी ने कथित तौर पर ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली।

मृतक के बेटे कनाई माझी का कहना है कि उनके पिता का नाम वर्ष 2002 की एसआईआर की फिजिकल मतदाता सूची में मौजूद था, लेकिन जब ऑनलाइन डेटाबेस में सूची देखी गई तो उनका नाम नहीं मिला।

Following a notice from the Election Commission two elderly people committed suicide a complaint h

इसी आधार पर उन्हें सुनवाई का नोटिस भेजा गया। परिवार का आरोप है कि नोटिस मिलने के कुछ ही घंटों बाद दुर्जन माझी ने जान दे दी।

हावड़ा और पूर्वी मिदनापुर की घटनाएं

इसी तरह हावड़ा के रहने वाले 64 वर्षीय जमाल अली शेख की भी सोमवार को सुनवाई नोटिस मिलने के तुरंत बाद मौत हो गई। उनके बेटे ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया, जिससे उनके पिता को गंभीर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जबकि वे एक वैध मतदाता थे।

इसके अलावा पूर्वी मिदनापुर में 75 वर्षीय बिमल शी ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग से नोटिस मिलने के बाद से वे भी काफी परेशान थे।

चुनाव आयोग का पक्ष

इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने साफ किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त या राज्य के निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती

आयोग ने 27 दिसंबर को जारी एक सूचना में कहा था कि ऐसे करीब 1.3 लाख मतदाता, जिनके नाम 2002 की फिजिकल एसआईआर सूची में थे लेकिन तकनीकी कारणों से ऑनलाइन डेटाबेस में नहीं दिख रहे थे, उन्हें सुनवाई के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।

एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने कहा, “कानून के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए किसी आपराधिक अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। इस तरह की किसी भी एफआईआर का कोई कानूनी आधार नहीं है।”

राजनीतिक और कानूनी टकराव तेज

इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। जहां परिजन और विपक्ष इसे प्रशासनिक दबाव का नतीजा बता रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को पूरी तरह वैधानिक और नियमों के अनुरूप बता रहा है।

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