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बंगाल SIR: वोटर लिस्ट की अपीलों के लिए बढ़ेंगे ट्रिब्यूनल, 12 साल की देरी के अनुमान के बाद EC का बड़ा कदम

कोलकाता हिन्दी न्यूज | 23 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद और कानूनी प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने लंबित अपीलों के जल्द निपटारे के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल हलफनामे में राज्य की 42 लोकसभा सीटों के हिसाब से 42 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल 19 ट्रिब्यूनल इन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं।

37 लाख से ज्यादा अपीलें अभी लंबित

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, SIR से जुड़े नाम जोड़ने और नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली कुल 38.31 लाख अपीलें ट्रिब्यूनलों के सामने दाखिल हुई हैं। इनमें 22.21 लाख अपीलें उन लोगों की हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए और वे दोबारा नाम शामिल कराने की मांग कर रहे हैं।

वहीं 16.10 लाख अपीलें मतदाता सूची में शामिल नामों के खिलाफ दाखिल की गई हैं। 16 सितंबर तक इनमें से 37,05,235 अपीलें लंबित थीं।

आयोग के अनुसार, अप्रैल के मध्य से ट्रिब्यूनलों ने 1,26,194 मामलों का निपटारा किया है। इस गति के आधार पर, सप्ताह के सातों दिन काम करने की गणना के बावजूद मौजूदा लंबित मामलों को निपटाने में करीब 146 महीने यानी 12 साल से अधिक का समय लग सकता है।

19 से बढ़ाकर 42 ट्रिब्यूनल करने का प्रस्ताव

लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए चुनाव आयोग ने ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है। प्रस्ताव के तहत पश्चिम बंगाल की प्रत्येक लोकसभा सीट के लिए एक अपीलीय ट्रिब्यूनल रखने की योजना है। यानी मौजूदा 19 ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाकर 42 की जा सकती है।

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आयोग का कहना है कि इससे SIR से संबंधित अपीलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है।

अब तकनीक के जरिए सुनवाई में तेजी लाने की तैयारी

ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ सुनवाई की प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग ने न्यायिक अधिकारियों को अधिक लचीले तरीके से काम करने और समय बचाने की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है।

इसका उद्देश्य यह है कि ट्रिब्यूनल के न्यायिक अधिकारी केवल किसी निर्धारित भवन में उपस्थित रहकर ही सुनवाई करने तक सीमित न रहें। तकनीकी माध्यमों के इस्तेमाल से दस्तावेजों की जांच और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने की कोशिश की जा रही है।

अब तक 1.13 लाख से ज्यादा नाम दोबारा जुड़े

चुनाव आयोग के हलफनामे के मुताबिक, अब तक ट्रिब्यूनलों ने 1,26,194 अपीलों पर फैसला किया है। इनमें 1,13,943 मामलों में आवेदकों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का फैसला हुआ। यानी अब तक निपटाए गए मामलों में 90 फीसदी से अधिक मामलों में नाम बहाल किए गए हैं।

यह आंकड़ा उन अपीलों के निपटारे से संबंधित है जिन पर ट्रिब्यूनलों ने अब तक निर्णय दिया है। इसे पूरी लंबित सूची के परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के बाद बढ़ी हलचल

SIR से जुड़ी अपीलों की संख्या और उनके निपटारे की गति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जानकारी मांगी थी। इसके बाद आयोग ने लंबित मामलों की संख्या, अब तक हुए निपटारे और आगे की व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष अदालत के सामने रखा।

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आयोग के मुताबिक मौजूदा व्यवस्था में जिस गति से मामले निपटाए जा रहे हैं, उससे पूरा बैकलॉग खत्म करने में लंबा समय लग सकता है। इसी वजह से अधिक ट्रिब्यूनल की जरूरत बताई गई है।

SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने को लेकर राजनीतिक तथा कानूनी बहस जारी है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में उन दावों पर भी आपत्ति जताई है जिनमें मतदाता सूची से हटाए गए नामों और विधानसभा चुनाव में जीत के अंतर की तुलना करके चुनाव परिणामों पर SIR के प्रभाव का दावा किया गया था।

आयोग ने कहा है कि ऐसी तुलना में ‘अनुपस्थित’, ‘स्थानांतरित’, ‘मृत’ और ‘डुप्लीकेट’ जैसी श्रेणियों को अलग-अलग देखने की जरूरत है। आयोग ने इस तरह की तुलना को अविश्वसनीय बताया है।

अब 42 ट्रिब्यूनल के प्रस्ताव पर नजर

वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों में नाम शामिल होना या हटना सीधे मतदाता की चुनावी पात्रता से जुड़ा विषय है। ऐसे में लाखों लंबित अपीलों के जल्द निपटारे को लेकर चुनाव आयोग की ओर से ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण है।

अब नजर इस बात पर है कि 19 से 42 ट्रिब्यूनल करने के प्रस्ताव और सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सुझाई गई तकनीकी व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट का अगला रुख क्या रहता है।

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