- SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा पर ज़ोर
- कानून-व्यवस्था में चूक पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
कोलकाता | 22 जनवरी 2026: निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी 2026 के आदेश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य सरकार को जारी किए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अव्यवस्था, दबाव या कानून-व्यवस्था की समस्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह निर्देश रिट याचिका (सिविल) संख्या 1089/2025 – मोस्टारी बानू बनाम निर्वाचन आयोग में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में जारी किए गए हैं।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश:
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि—
- एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी, सुगम और नागरिकों के लिए कम से कम तनावपूर्ण होनी चाहिए
- लोगों को अनावश्यक परेशान न किया जाए
- आपत्तियों और दस्तावेजों के निपटारे के लिए स्थानीय और सुलभ स्थान उपलब्ध कराए जाएं
🏫 पंचायत भवन से वार्ड ऑफिस तक सुनवाई के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि एसआईआर से जुड़ी—
- दस्तावेज़ों की जांच
- आपत्तियों का निपटारा
- सुनवाई की प्रक्रिया
निम्नलिखित स्थानों पर की जाए—
- ग्राम पंचायत भवन
- प्रत्येक तालुका / उप-मंडल के सार्वजनिक स्थल
- ब्लॉक कार्यालय
- शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालय
👥 आपत्तियों के लिए पर्याप्त स्टाफ तैनात हो
राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि—
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को
1.25 से 1.36 करोड़ लोगों (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी) की आपत्तियों के निपटारे के लिए
पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराई जाए - प्रत्येक जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि
- हर सुनवाई स्थल पर पर्याप्त कर्मचारी, पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद हों
🚨 पुलिस अधिकारियों को सख्त चेतावनी
निर्वाचन आयोग ने—
- पुलिस महानिदेशक (DGP)
- कोलकाता पुलिस आयुक्त
- सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों
को स्पष्ट निर्देश दिया है कि—
- सुनवाई स्थलों पर कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो
- एसआईआर की पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो
पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि “यदि किसी अधिकारी या विभाग की चूक से एसआईआर प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
📌 सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि—
- राज्य की लगभग 20% आबादी (करीब 1.36 करोड़ लोग) को
‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नोटिस जारी किए गए हैं - इससे लोगों पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ा है
इसी को देखते हुए कोर्ट ने—
- मतदाता नामों को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने
- अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दस्तावेज़ जमा करने
- कक्षा 10 के एडमिट कार्ड को वैध पहचान प्रमाण मानने जैसे निर्देश दिए थे।
🗳️ 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा अभियान
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर—
- 2026 विधानसभा चुनाव (संभावित अप्रैल–मई) से पहले
- मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने के उद्देश्य से
- बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है
इसी कारण यह प्रक्रिया राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। यह निर्देश 2026 विधानसभा चुनाव (संभावित अप्रैल-मई) से पहले मतदाता सूची को शुद्ध करने के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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