Police in Bengal stopped Subhendu Adhikari from visiting Sandeshkhali

बंगाल की जनता ने SIR को आशा की किरण के रूप में देखा: शुभेंदु अधिकारी

कोलकाता, 5 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर एसआईआर प्रक्रिया को “निडरतापूर्वक” जारी रखने का आग्रह किया। यह पत्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा तीन जनवरी को एसआईआर रोकने की मांग वाले पत्र के ठीक दो दिन बाद आया है।

शुभेंदु अधिकारी ने अपने पत्र में तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ममता बनर्जी का एसआईआर रोकने का आह्वान “हार स्वीकार करने” से कम नहीं है।उन्होंने इसे TMC की “चुनावी कदाचार को जारी रखने की शर्मनाक कोशिश” करार दिया।

अधिकारी ने TMC की “शिकायतों की लंबी सूची” को तथ्यात्मक रूप से गलत और निर्वाचन आयोग को राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश बताया।

एक्स पर साझा पत्र में अधिकारी ने दावा किया: “इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल की जनता ने एसआईआर को आशा की किरण के रूप में देखा है। ‘चिंता और परेशानी’ की उनकी झूठी कहानी तृणमूल द्वारा रचा गया एक भ्रम का जाल है, जिसे उन लोगों ने तोड़ दिया है जो उनकी संरक्षण की राजनीति को नकारते हैं और निष्पक्ष मतदान को तरजीह देते हैं।”

अधिकारी ने इन आरोपों को भी खारिज किया

  • बेवजह की जल्दबाजी और अपर्याप्त तैयारी के आरोपों को गलत बताया।
  • कहा कि राज्य में 50,000 से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को प्रशिक्षण दिया गया है।
  • TMC पर आरोप लगाया कि वे जमीनी स्तर के अधिकारियों को डरा-धमका कर और गलत सूचना फैलाकर एसआईआर में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं।

अधिकारी ने CEC से आग्रह किया: “मैं निर्वाचन आयोग से आग्रह करता हूं कि वह लोकतांत्रिक जनसमूह के अटूट समर्थन से सशक्त होकर निडरतापूर्वक एसआईआर को आगे बढ़ाए। यह प्रक्रिया संविधान पर हमला नहीं, बल्कि उसकी सच्ची पुष्टि है जो हमारे चुनावों पर लंबे समय से छाए अंधकार को दूर करती है।”

ममता बनर्जी का पत्र – क्या था आग्रह?

तीन जनवरी को ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर एसआईआर को “मनमानी और त्रुटिपूर्ण” बताते हुए तत्काल रोकने की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि प्रक्रिया जारी रहने से “बड़े पैमाने पर लोगों का मताधिकार छीन सकता है” और यह “लोकतंत्र की नींव पर प्रहार” होगा।

दोनों पक्षों की रणनीति

  • TMC: एसआईआर को “वास्तविक मतदाताओं को वोट से वंचित करने की साजिश” बता रही है।
  • BJP: इसे “फर्जी वोटर हटाने” और “चुनावी शुचिता” सुनिश्चित करने की जरूरी प्रक्रिया मान रही है।

अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री की ओर से उठाए जा रहे सवाल न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, बल्कि उनका उद्देश्य निर्वाचन आयोग को राजनीतिक रूप से प्रेरित संस्था बताकर बदनाम करना और आम जनता के बीच डर व भ्रम फैलाना है।

यह पत्र SIR विवाद को और भड़का सकता है, क्योंकि 2026 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। 

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 × four =