Sir supreme court

SIR प्रक्रिया पर विवाद: मतदाता सूची में छेड़छाड़ का आरोप, विपक्ष ने दाखिल की याचिका

कोलकाता | 21 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल CPM और कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को “मनमाना” और “अवैध” करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया को गलत तरीके से लागू कर रहा है, जिससे मतदाता सूची में व्यापक बदलाव की आशंका पैदा हो गई है।


क्या है विवाद?

SIR प्रक्रिया मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए होती है, जिसमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृत/डुप्लीकेट नामों की हटाई और विवरण सुधार शामिल होते हैं। लेकिन CPM और कांग्रेस का दावा है कि—

  • कई जगहों पर SIR प्रक्रिया बिना पर्याप्त नोटिस के चलाई जा रही है
  • बूथ स्तर पर मतदाताओं को सूचित किए बिना सत्यापन हो रहा है
  • BLOs को “टारगेट बेस्ड लिस्ट” दी जा रही है
  • इससे मतदाता सूची में गलत तरीके से कटौती हो सकती है

पार्टियों ने इसे “अलोकतांत्रिक” और चुनावी प्रक्रिया को “प्रभावित करने वाला” कदम बताया।


विपक्ष का क्या कहना है?

CPM का आरोप

  • SIR के नाम पर आयोग मतदाता सूची को “चयनित तरीके” से संशोधित कर रहा है।
  • कई बूथों में गलत तरीके से नाम काटे गए, लेकिन मतदाता को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

  • कांग्रेस नेताओं ने इसे “चुनावी पक्षपात” बताया है।
  • पार्टी का कहना है कि आयोग को पारदर्शी और ऑडिटेड प्रक्रिया अपनानी चाहिए, न कि जल्दबाज़ी में संशोधन करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में क्या मांगा गया?

दोनों दलों ने संयुक्त रूप से यह अपील की है कि—

  • SIR प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा हो
  • सभी जिलों में मतदाता सूची संशोधन पर तुरंत रोक लगाई जाए
  • संशोधित मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए
  • BLOs की कार्रवाई की जांच कराई जाए

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि SIR इसी तरह जारी रहा, तो चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्न उठेंगे।


चुनाव आयोग की तरफ से क्या प्रतिक्रिया?

चुनाव आयोग ने कहा कि—

  • SIR प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप है
  • किसी भी राजनीतिक दल की शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी
  • लक्ष्य पारदर्शी और अपडेटेड मतदाता सूची तैयार करना है

EC ने यह भी कहा कि SIR के हर चरण की वीडियो मॉनिटरिंग और ऑन-रिकॉर्ड रिपोर्टिंग की गई है।


मतदाताओं पर इसका क्या असर?

राजनीतिक विवाद के बावजूद, SIR से निम्न बदलाव प्रभावित हो सकते हैं—

  • नए मतदाताओं का पंजीकरण
  • गलत पते/नाम सुधार
  • डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं का हटना
  • विवादित क्षेत्रों में भटकाव की स्थिति

यदि सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करता है, तो SIR की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रुक सकती है।


Quick Info Box

मुद्दा: SIR प्रक्रिया पर विवाद
आरोप लगाने वाले दल: CPM, कांग्रेस
कहाँ मामला गया: सुप्रीम कोर्ट
मुख्य आरोप: “मनमानी प्रक्रिया”, मतदाता सूची में छेड़छाड़ की आशंका
EC का कहना: प्रक्रिया नियम अनुसार, पारदर्शी और मॉनिटरिंग में


🌍 राजनीतिक महत्व

  • पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
  • विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा का सवाल बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे सामान्य प्रक्रिया कह रहा है।
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाले महीनों में बंगाल की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

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