Mamata banerjee

बंगाल में SIR शुरू होने के बाद से अब तक 28 की मौत, ममता ने आयोग को घेरा

कोलकाता | 19 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान लगातार मौतों की खबरें सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि इस प्रक्रिया के चलते अब तक 28 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान “अमानवीय दबाव” पैदा कर रहा है।

🗣️ मुख्यमंत्री का बयान

  • ममता बनर्जी ने कहा: “आज फिर हमने एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खो दिया। यह अमानवीय दबाव है, जो लोगों की जान ले रहा है।”
  • उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया “अनियोजित और लगातार बढ़ते काम का बोझ” है।
  • मुख्यमंत्री ने मांग की कि आयोग को तुरंत इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

उन्होंने लिखा कि एसआइआर शुरू होने के बाद से अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है और इसके लिए आयोग का “अनियोजित” निर्णय जिम्मेदार है। चुनाव आयोग ने अक्टूबर के अंत में बंगाल में एसआइआर की शुरुआत की थी।

आयोग ने स्पष्ट किया था कि जिनके नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज हैं या जिनके परिवारों में नाम मौजूद हैं, उन्हें किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

इसके बावजूद, लोगों के बीच असुरक्षा और भय का माहौल बना हुआ है। हजारों सवाल और आशंकाएं लोगों के मन में घर कर चुकी हैं।

🚨 ताज़ा घटनाक्रम

  • जलपाईगुड़ी जिले के माल ब्लॉक में एक BLO की मौत के बाद विवाद और गहरा गया।
  • मृतक एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं, जिन्हें BLO के रूप में नियुक्त किया गया था।
  • परिवार का दावा है कि वह SIR कार्य के दबाव को सहन नहीं कर सकीं।

यह स्थिति बेहद दुखद है और समाज में अस्थिरता पैदा कर रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) पर अत्यधिक काम का दबाव डाला जा रहा है, जिसके कारण वे मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर रहे हैं।

📚 पृष्ठभूमि

  • SIR प्रक्रिया के तहत राज्य में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है।
  • BLO और अन्य फील्ड वर्कर्स पर काम का बोझ बढ़ने से कई मौतें दर्ज हुई हैं।
  • विपक्षी दलों ने भी इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है।

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि जिस काम को पूरा करने में पहले तीन साल लगते थे, उसे अब राजनीतिक कारणों से मात्र दो महीने में पूरा करने का दबाव डाला जा रहा है।

उन्होंने इसे “अतिवादी निर्णय” करार दिया और कहा कि इस जल्दबाजी के कारण आम नागरिकों और कर्मचारियों की जान पर बन आई है।

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