SIR process accelerated in Bengal

SIR प्रक्रिया में मुसलमानों की मदद के लिए इमामों और अल्पसंख्यक समूहों का राज्यव्यापी अभियान शुरू

कोलकाता | 10 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुस्लिम समुदाय में भ्रम और उत्पीड़न की आशंका के बीच अल्पसंख्यक संगठनों, मस्जिद समितियों और वरिष्ठ इमामों ने राज्यव्यापी सहायता अभियान शुरू किया है।

🕌 मस्जिदों से जागरूकता की अपील

  • लगभग 40,000 मस्जिदों से सार्वजनिक अपीलें जारी
  • मुस्लिम-बहुल इलाकों में संपर्क कार्यक्रम
  • नागरिकों से आग्रह:
    • शांति बनाए रखें
    • SIR फॉर्म सावधानी से भरें
    • डरें नहीं, भ्रम से बचें

इमामों और सामाजिक समूहों ने न केवल लगभग 40,000 मस्जिदों से, बल्कि राज्य भर के मुस्लिम-बहुल इलाकों में संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से भी सार्वजनिक अपील जारी करना शुरू कर दिया है, जिसमें निवासियों से शांति बनाए रखने, एसआईआर प्रपत्र सावधानीपूर्वक भरने और नहीं घबराने का आग्रह किया जा रहा है।

🗣️ धार्मिक नेताओं की भूमिका

  • इमाम-ए-दीन काजी फजलुर रहमान (रेड रोड, कोलकाता):

    “इमामों का धर्मग्रंथों से परे भी एक कर्तव्य है… हम लोगों को SIR प्रक्रिया में मार्गदर्शन दे रहे हैं।”

  • मौलाना शफीक कासमी (नखोदा मस्जिद):

    “इतने कम समय में 10 करोड़ लोगों के लिए SIR करना संभव नहीं… यह उत्पीड़न में बदल सकता है।”

कोलकाता में रेड रोड पर वार्षिक नमाज पढ़ाने वाले इमाम-ए-दीन काजी फजलुर रहमान ने बताया कि धार्मिक नेता नागरिकों का मार्गदर्शन करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इमामों का धर्मग्रंथों से परे भी एक कर्तव्य है। हम लोगों से कह रहे हैं कि वे घबराएं नहीं। हम उन्हें एसआईआर प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं। मस्जिद समितियां नागरिकों को सही तरीके से प्रपत्र भरने में मदद कर रही हैं क्योंकि डर और भ्रम से उबरने में लोगों की मदद करने के लिए जागरूकता जरूरी है।’’

🧾 SIR प्रक्रिया की समयरेखा

चरण तारीख
प्रक्रिया की शुरुआत 4 नवंबर 2025
फॉर्म वितरण और सत्यापन 4 नवंबर – 4 दिसंबर
मसौदा मतदाता सूची 9 दिसंबर 2025
दावे और आपत्तियाँ 8 जनवरी 2026 तक
सुनवाई 31 जनवरी 2026 तक
अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026

एसआईआर प्रक्रिया चार नवंबर से शुरू हुई। इसके तहत 80,000 से अधिक बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर प्रपत्र बांट रहे हैं और दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं।

यह महीने भर चलने वाली प्रक्रिया चार दिसंबर तक जारी रहेगी और नौ दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

🧭 सहायता केंद्र और प्रशिक्षण सत्र

  • नखोदा मस्जिद सहित कई मस्जिदों में सहायता डेस्क स्थापित
  • नमाज के बाद दैनिक प्रशिक्षण सत्र
  • दस्तावेज़ों की जांच, फॉर्म भरने और प्रक्रिया समझाने में मदद

कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने कहा कि इतने कम समय में लगभग 10 करोड़ लोगों के लिए एसआईआर की प्रक्रिया करना ‘‘संभव नहीं हो सकता’’ और इसके कारण उत्पीड़न की संभावना है।

कासमी ने कहा, ‘‘यह उत्पीड़न में बदल जाएगा। सरकार लोगों की मदद करने के लिए है, उन्हें परेशान करने के लिए नहीं।’’

⚖️ सामाजिक संदर्भ

  • गरीब और हाशिए पर रहने वाले परिवार, जिनके पास व्यवस्थित दस्तावेज़ नहीं, वे सबसे अधिक प्रभावित
  • धार्मिक और सामाजिक समूहों का उद्देश्य:
    • भ्रम और डर को कम करना
    • सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल कराना

मौलवियों की पहल के समानांतर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी के नेतृत्व में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बंगाल इकाई ने अपने 16 लाख सदस्यों, 22 जिलों में 625 इकाइयों, 1,100 मदरसों, 1.65 लाख छात्रों और 25,000 शिक्षकों के नेटवर्क का उपयोग करके एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है।

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