कोलकाता | 25 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान अब तक 10.33 लाख फॉर्म “अनकलेक्टेबल” पाए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि ये फॉर्म ऐसे मतदाताओं से जुड़े हैं जो या तो अनुपस्थित, मृत, डुप्लीकेट या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं।
🌟 मुख्य आँकड़े
- राज्य में अब तक 7.64 करोड़ फॉर्म वितरित किए गए।
- इनमें से 4.55 करोड़ फॉर्म का संग्रह और डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है।
- इनमें से 10.33 लाख फॉर्म (1.35%) अनकलेक्टेबल पाए गए हैं।
CEO ने कहा कि यह रियल-टाइम डेटा है। ये फॉर्म इकट्ठा नहीं किए जा सकते क्योंकि वोटर या तो गैर-हाजिर थे, डुप्लीकेट थे, मर चुके थे या हमेशा के लिए शिफ्ट हो गए थे.
अग्रवाल ने कहा, ‘आज शाम 4 बजे तक 4.55 करोड़ फॉर्म इकट्ठा करने और डिजिटाइज करने का काम पूरा हो गया है. इनमें से 10.33 लाख फॉर्म इकट्ठा नहीं किए जा सकते.

🗣️ CEO का बयान
- अग्रवाल ने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) इस प्रक्रिया के “वास्तविक नायक” हैं।
- कई BLOs देर रात तक काम कर रहे हैं ताकि हर मतदाता तक पहुँचा जा सके।
- उन्होंने बताया कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य है कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन किया जाए।
यह रियल-टाइम डेटा है. उन्होंने बताया कि राज्य में 7.64 करोड़ फॉर्म बांटे जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि अभी के लिए, ‘इकट्ठा नहीं किए जा सकने वाले फॉर्म बांटे गए कुल फॉर्म का 1.35 प्रतिशत है.
अग्रवाल ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में बूथ-लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि वे इस काम के असली हीरो हैं.
⚖️ राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
- SIR प्रक्रिया पहले से ही बंगाल में राजनीतिक विवाद का केंद्र बनी हुई है।
- विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ और अनियमितताएँ हो रही हैं।
- अब CEO का यह बयान चुनावी तैयारी और पारदर्शिता पर नई बहस को जन्म दे रहा है।
राज्य में एसआईआर के लिए 80,600 से ज्यादा बीएलओ, लगभग 8000 सुपरवाइजर, 3000 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और 294 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर लगाए गए हैं.
बीएलओ को आ रही इंटरनेट की दिक्कतों के बारे में पूछे जाने पर एक और चुनाव अधिकारी ने कहा कि आसान कनेक्टिविटी के लिए वाईफाई हब बनाए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘बीएलओ को डेटा एंट्री में मदद करने के लिए डीएम, ईआरओ और बीडीओ ऑफिस में हेल्प डेस्क हैं.
जहां भी इंटरनेट की दिक्कतें हैं, वहां अलग से वाईफाई हब बनाए गए हैं.’ चीफ इलेक्शन ऑफिसर ने कहा कि अगर कोई बीएलओ बीमार पड़ता है तो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट उसकी मेडिकल केयर के लिए जिम्मेदार होगा.
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