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बंगाल: SIR में चौंकाने वाला खुलासा, पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के नाम कटे

कोलकाता, 2 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया ने एक बड़ा और चिंताजनक खुलासा किया है। मतदाता सूची से कुल करीब 58 लाख नाम हटाए गए हैं,

लेकिन इनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से काफी ज्यादा निकली – लगभग 4 लाख अतिरिक्त महिलाओं के नाम डिलीट हो गए।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ‘मृत्यु’ के कारण हटाए गए नामों में भी महिलाओं का प्रतिशत असामान्य रूप से ऊंचा रहा है।

यह पैटर्न सिर्फ बंगाल में नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी दिखा है, जिससे जेंडर बायस और संभावित गड़बड़ी के गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

महिलाओं के नाम क्यों ज्यादा प्रभावित हुए?

चुनाव आयोग के दिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट रोल के पोलिंग स्टेशन लेवल डेटा के गहन विश्लेषण से यह सच्चाई सामने आई है। कुल 58.20 लाख नाम हटाए गए, जिनमें मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या लापता वोटर्स शामिल हैं।

लेकिन कई पोलिंग स्टेशनों पर 75% से ज्यादा डिलीटेड नाम महिलाओं के थे। कुछ जगहों पर तो यह आंकड़ा और भी ज्यादा चौंकाने वाला था।

विशेषज्ञ बताते हैं कि घर-घर सत्यापन के दौरान महिलाएं अक्सर घर पर नहीं मिलतीं या उनके पास जरूरी दस्तावेज कम होते हैं, जिससे उनका नाम आसानी से कट जाता है।

लेकिन युवा महिलाओं की ‘मृत्यु’ के आंकड़े और कुछ स्टेशनों पर अस्वाभाविक पैटर्न ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है – क्या यह महज संयोग है या कुछ और चल रहा है?

यह समस्या बंगाल के अलावा तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों में भी सामने आई है, जहां SIR के दौरान महिलाओं के नाम ज्यादा प्रभावित हुए।

महिलाओं की वोटिंग भागीदारी पहले से ही एक बड़ा मुद्दा रही है, और अब यह आंकड़ा लोकतंत्र की सेहत पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

राजनीतिक हंगामा और जांच की मांग

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही SIR को केंद्र की राजनीतिक साजिश करार दिया था। अब महिलाओं के नाम ज्यादा हटने पर विपक्षी दल भी हमलावर हो गए हैं।

भाजपा इसे वोटर लिस्ट की जरूरी सफाई बता रही है, जबकि टीएमसी और अन्य विपक्षी पार्टियां जेंडर बायस और संभावित धांधली की गहराई से जांच की मांग कर रही हैं।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि डिलीशन अभी फाइनल नहीं है – दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी 2026 को जारी होगी।

2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। अगर आपका या आपके परिवार के किसी सदस्य का नाम हटा है, तो फॉर्म 6 या 7 भरकर तुरंत दावा करें – समय बहुत कम है!

क्या यह सिर्फ तकनीकी गलती है या बड़ा खेल चल रहा है? आप क्या सोचते हैं – कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं और इस खबर को शेयर करें ताकि ज्यादा लोग जागरूक हों!

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