SIR

हर दिन 7 लाख सुनवाई का टारगेट: ECI ने बंगाल में SIR 7 फरवरी तक पूरा करने का रखा लक्ष्य

कोलकाता, 18 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई पूरी करने के लिए राज्य के 6,500 सुनवाई केंद्रों पर हर दिन 7 लाख सुनवाई का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह काम तय समय पर पूरा हो जाएगा, क्योंकि प्रत्येक अधिकारी को औसतन हर दिन लगभग 107 मामलों की सुनवाई करनी है।

सुनवाई की डेडलाइन और फाइनल लिस्ट

आयोग ने स्पष्ट किया है कि दावों और आपत्तियों पर सुनवाई की अंतिम तारीख 7 फरवरी 2026 है। इसके बाद 14 फरवरी 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

सुनवाई प्रक्रिया में अब तक अनमैप्ड वोटरों (जिन्होंने 2002 की लिस्ट से सेल्फ-मैपिंग या प्रोजेनी-मैपिंग नहीं की) के मामले लगभग पूरे हो चुके हैं। अगले कुछ दिनों में लॉजिकल विसंगति (अजीब फैमिली-ट्री डेटा) वाले मामलों की सुनवाई पूरी कर ली जाएगी।

दो चरणों में होगा वेरिफिकेशन

चुनाव आयोग ने पहले ही निर्देश जारी किए हैं कि सुनवाई में बुलाए गए वोटरों के सहायक दस्तावेजों का दो चरणों में वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन होगा।

पहले चरण में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और दूसरे चरण में जिला मजिस्ट्रेट (जो जिला चुनाव अधिकारी भी हैं) जांच करेंगे।

आयोग ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार के डोमिसाइल सर्टिफिकेट और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के माध्यमिक परीक्षा एडमिट कार्ड को असली पहचान पत्र नहीं माना जाएगा।

चुनाव की समयसीमा पर संकेत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ दिनों पहले कोलकाता में मीडिया से बातचीत में कहा था कि मतदान और मतगणना अप्रैल के आखिर तक पूरी हो जाएगी।

SIR पूरा होने और फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद चुनाव आयोग जल्द ही विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल-मई 2026 में चुनाव होने की संभावना सबसे ज्यादा है।

SIR का महत्व और विवाद

SIR प्रक्रिया में लाखों नामों की समीक्षा हो रही है, जिसमें मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अनमैप्ड वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं।

टीएमसी ने इसे केंद्र की साजिश बताया है, जबकि भाजपा इसे वोटर लिस्ट की सफाई करार दे रही है।

2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह प्रक्रिया राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

अगर आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है या कोई आपत्ति है, तो तुरंत संबंधित सुनवाई केंद्र पर जाएं – समय बहुत कम बचा है!

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