शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक केंद्र शांतिनिकेतन में रविवार को विश्वप्रसिद्ध पौष मेला पूरे पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ शुरू हो गया।
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू की गई इस ऐतिहासिक परंपरा के तहत देश-विदेश से आए हजारों पर्यटक और कलाकार शांतिनिकेतन पहुंचे हैं। मेले के सफल आयोजन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
पारंपरिक रस्मों के साथ हुई शुरुआत
पौष मेले की शुरुआत ब्रह्म समाज की प्रार्थना सभा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। इसके बाद बाउल संगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक गीतों ने शांतिनिकेतन को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

मेले में बंगाल की लोक कला, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद और पारंपरिक खान-पान के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
देश-विदेश के कलाकार कर रहे प्रस्तुति
इस वर्ष के पौष मेले में बंगाल के साथ-साथ अन्य राज्यों के लोक कलाकार भी हिस्सा ले रहे हैं। बाउल गायन, छऊ नृत्य, कीर्तन और आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आगामी दिनों तक चलेगी। पर्यटकों के लिए यह मेला बंगाल की सांस्कृतिक आत्मा को करीब से देखने का अवसर माना जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं।
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संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती
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सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
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ट्रैफिक कंट्रोल और पार्किंग के विशेष इंतजाम
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महिला पुलिस और स्वयंसेवकों की तैनाती
प्रशासन का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम और मेडिकल टीम को अलर्ट पर रखा गया है।
प्रशासन ने की अपील
प्रशासन ने पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कोविड-जैसी बीमारियों से बचाव को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई बनाए रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा कर्मियों का सहयोग करें।
पौष मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि रवींद्रनाथ टैगोर की सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का प्रतीक माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी शांतिनिकेतन कुछ दिनों के लिए कला, संगीत और परंपरा का जीवंत केंद्र बन गया है।
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