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सरकारी मदद चाहिए तो स्कूलों में गाना होगा पूरा ‘वंदे मातरम्’, मदरसे पर CM का बड़ा बयान

कोलकाता हिन्दी न्यूज | 04 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था में कथित भेदभाव खत्म कर एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिया है।

गोलपार्क स्थित रामकृष्ण मिशन में विद्या भारती के वार्षिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी अनुदान लेने वाले स्कूलों की प्रार्थना सभा में पूर्ण ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राज्य में अलग मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार की नीति में बदलाव किया जा सकता है। उनके बयान के बाद पश्चिम बंगाल की शिक्षा नीति और स्कूलों में धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

सरकारी अनुदान को लेकर क्या बोले मुख्यमंत्री?

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रार्थना सभा में पूर्ण ‘वंदे मातरम्’ गाने की अनिवार्यता का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी कि पूरा गीत क्यों गाया जाए।

उन्होंने दावा किया कि सरकारी सहायता लेने और देने, दोनों को लेकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सचिव की ओर से उन्हें एक वीडियो भी भेजा गया था, जिसमें कुछ लोग खड़े तो थे, लेकिन उनके अनुसार वे गीत के दौरान होंठ नहीं हिला रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल खड़े रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ‘वंदे मातरम्’ के गायन में भाग लेना भी जरूरी है।

‘अलग मदरसा शिक्षा व्यवस्था नहीं रहेगी’ का संकेत

मुख्यमंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अलग-अलग व्यवस्थाओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राज्य में अलग मदरसा शिक्षा प्रणाली को लेकर भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

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उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा विभाग के अधीन देखा जाना चाहिए और किसी एक संस्थान को अलग व्यवस्था के तहत संचालित करने की नीति पर भी पुनर्विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था की भविष्य की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई विस्तृत नीतिगत अधिसूचना या अंतिम निर्णय सामने आना अभी बाकी है।

एक साल में 1,000 विद्यामंदिर बनाने का लक्ष्य

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्या भारती से जुड़े विद्यामंदिरों को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने घोषणा की कि अगले एक वर्ष के भीतर पंचायत स्तर तक राज्य में विद्या भारती के विद्यामंदिरों की संख्या बढ़ाकर 1,000 करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं और वैचारिक दृष्टिकोण को भी सामने रखा।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ आगे बढ़ रही है और श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर तथा स्वामी विवेकानंद जैसे व्यक्तित्वों के विचारों को शिक्षा व्यवस्था में महत्व दिया जाएगा।

पाठ्यक्रम को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में वाम शासन और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल की शिक्षा नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के इतिहास और कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के योगदान को पाठ्यक्रम में अपेक्षित महत्व नहीं मिला।

उन्होंने सिंघुर में टाटा परियोजना से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को राजनीतिक घटनाओं की जानकारी तो दी गई, लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद के पश्चिम बंगाल के निर्माण में योगदान जैसे विषयों को पर्याप्त जगह नहीं मिली।

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मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी खुदीराम बोस और मातंगिनी हाजरा का भी उल्लेख किया और कहा कि विद्यार्थियों को राज्य तथा देश के इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराना जरूरी है।

चंदन का तिलक हटाने पर भी सवाल

मुख्यमंत्री ने कोलकाता के एक स्कूल में कथित तौर पर एक छोटे बच्चे के माथे से चंदन का तिलक हटाए जाने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर निर्णय उसका अपना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कौन तिलक लगाएगा, कौन शिखा रखेगा या कौन गले में तुलसी की माला धारण करेगा, यह उसकी व्यक्तिगत परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है।

कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद

विद्या भारती के इस वार्षिक कार्यक्रम में संगठन से जुड़े जतिंद्र कुमार शर्मा, रवींद्र चामरिया समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत से जुड़े कई लोगों ने मुख्यमंत्री को आर्थिक सहायता भी प्रदान की।

मुख्यमंत्री के इस संबोधन के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सरकार किस तरह के औपचारिक दिशा-निर्देश जारी करती है और मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या नीतिगत कदम उठाए जाते हैं।

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