कोलकाता हिन्दी न्यूज | 12 जुलाई 2026: पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil-Teacher Ratio) को संतुलित करने के लिए राज्यभर के सरकारी स्कूलों में सरप्लस (अतिरिक्त) शिक्षकों के तबादले का फैसला किया है।
इस प्रक्रिया की शुरुआत प्राथमिक विद्यालयों से की जाएगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने की तैयारी भी तेज कर दी गई है और शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने पर जोर
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के अनुसार प्रत्येक 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन कई स्कूलों में यह संतुलन नहीं है।
कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, जबकि कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में सरप्लस शिक्षकों का स्थानांतरण कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की योजना बनाई गई है।
सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों की उपलब्धता संतुलित होगी और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।
विपक्षी शिक्षक संगठनों ने जताई चिंता
हालांकि इस फैसले का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है, उन्हें पुनर्जीवित करने के बजाय सरकार अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें बंद करने की दिशा में बढ़ रही है।
विपक्षी शिक्षक संगठनों का आरोप है कि इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। जानकारी के अनुसार, भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ भी इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी कर रहा है।
NEP 2020 लागू करने की तैयारी तेज
राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए शिक्षकों का ऑनलाइन ओरिएंटेशन शुरू किया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ‘उज्जीवन चर्चा’ नामक ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की, जिसमें स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक वर्मन ने हिस्सा लिया।
मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य रटने की संस्कृति से बाहर निकलकर क्षमता-आधारित, खोजपरक, अनुभवात्मक और आनंदमय शिक्षा को बढ़ावा देना है। उनका कहना था कि हर छात्र की प्रतिभा को पहचानकर उसे विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए।
स्कूलों में होंगी नई सुविधाएं
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नई शिक्षा नीति के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थी प्राथमिक स्तर पर ही पढ़ाई करें।
इसके अलावा स्कूलों में स्वच्छ शौचालय, वेंडिंग मशीन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शिक्षा को अधिक आधुनिक, समावेशी और विद्यार्थियों के लिए आनंददायक बनाना है।
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